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बांदा में 48 डिग्री की भीषण गर्मी, सड़कों पर सन्नाटा; अस्पतालों में बढ़े डायरिया और उल्टी-दस्त के मरीज!

Banda इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है। जिले का तापमान 48 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जिससे जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। आसमान से बरसती आग और तपती हवाओं ने लोगों को घरों में कैद होने पर मजबूर कर दिया है। हालात ऐसे हैं कि दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसरा दिखाई दे रहा है और लोग बेहद जरूरी काम होने पर ही बाहर निकल रहे हैं।

बुंदेलखंड में गर्मी ने तोड़े रिकॉर्ड

पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र में पिछले कई दिनों से तापमान 47 से 48 डिग्री के बीच बना हुआ था, लेकिन अब बांदा का पारा 48 डिग्री के पार पहुंच गया है। तेज धूप और लू के थपेड़ों ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बाहर निकलने वाले लोग सिर पर गमछा या कपड़ा बांधकर ही घर से निकल रहे हैं।

मंगलवार को बांदा देश के सबसे गर्म शहरों में शामिल रहा। गर्म हवाओं के चलते बाजारों में भीड़ कम हो गई है और दोपहर के समय सड़कों पर वाहन भी कम दिखाई दे रहे हैं। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी राहत मिलने की संभावना कम जताई है।

अस्पतालों में बढ़े मरीज

भीषण गर्मी का असर अब लोगों की सेहत पर भी दिखाई देने लगा है। जिला अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों में डायरिया, उल्टी-दस्त और डिहाइड्रेशन के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। खासकर बच्चे और बुजुर्ग अधिक प्रभावित हो रहे हैं।

डॉक्टरों ने लोगों को ज्यादा से ज्यादा पानी पीने, छाछ, जूस और अन्य तरल पदार्थ लेने की सलाह दी है। साथ ही धूप में निकलते समय पूरे कपड़े पहनने और सिर को ढककर रखने की अपील की गई है।

प्रशासन अलर्ट मोड पर

लगातार बढ़ते तापमान को देखते हुए प्रशासन ने भी अलर्ट जारी कर दिया है। सरकारी भवनों को कूलिंग सेंटर में बदला गया है ताकि जरूरतमंद लोगों को राहत मिल सके। अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में भी विशेष इंतजाम किए गए हैं।

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक बिना जरूरी काम के बाहर न निकलें। अगर बाहर जाना जरूरी हो तो पानी की बोतल साथ रखें और सिर को अच्छी तरह ढककर निकलें।

पेड़ों की कटाई को बताया वजह

स्थानीय लोगों का मानना है कि क्षेत्र में लगातार बढ़ती गर्मी की एक बड़ी वजह अंधाधुंध पेड़ों की कटाई और कम वृक्षारोपण भी है। लोगों का कहना है कि प्राकृतिक संसाधनों के लगातार दोहन की वजह से मौसम का संतुलन बिगड़ता जा रहा है। विशेषज्ञ भी पर्यावरण संरक्षण और बड़े स्तर पर वृक्षारोपण की जरूरत पर जोर दे रहे हैं।

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