107 दिन के संघर्ष के बाद बनी सहमति
करीब 107 दिनों तक चले तनाव और सैन्य संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इसकी घोषणा की। दोनों देशों के बीच औपचारिक समझौते पर स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर किए जाएंगे।
इस समझौते को पश्चिम एशिया में स्थिरता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। साथ ही इससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों को भी राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
सैन्य कार्रवाई पर लगेगी रोक
समझौते के तहत अमेरिका और ईरान तत्काल प्रभाव से सैन्य अभियानों को रोकने पर सहमत हुए हैं। दोनों देशों के बीच 60 दिनों का युद्धविराम लागू रहेगा। इस अवधि में कई अहम मुद्दों पर विस्तृत बातचीत की जाएगी।
होर्मुज स्ट्रेट फिर खुलेगा
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने का रास्ता साफ हो गया है। ट्रंप ने घोषणा की है कि शुक्रवार से होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोला जाएगा। इसके अलावा ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों और अवरोधों को भी हटाने की प्रक्रिया शुरू होगी।
ईरान को मिलेगा फ्रीज फंड
शांति समझौते के मसौदे के अनुसार अमेरिका ईरान की लगभग 25 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्तियों को जारी करेगा। बताया जा रहा है कि करीब 12 अरब डॉलर की राशि समझौते के शुरुआती चरण में ही रिलीज की जा सकती है।
परमाणु कार्यक्रम पर भी बनी सहमति
समझौते में ईरान ने परमाणु हथियार विकसित नहीं करने और यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम का विस्तार न करने का भरोसा दिया है। यह बिंदु अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पाकिस्तान की रही मध्यस्थ भूमिका
रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने में पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी सोशल मीडिया पर शांति समझौते का स्वागत किया।
ऊर्जा बाजार को मिलेगी राहत
होर्मुज स्ट्रेट के खुलने से वैश्विक तेल और एलपीजी सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद है। हाल के महीनों में इस मार्ग पर तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। विशेषज्ञों का मानना है कि समझौते के बाद ऊर्जा बाजार में स्थिरता आ सकती है।
इजरायल की प्रतिक्रिया पर नजर
हालांकि इस समझौते में इजरायल औपचारिक पक्षकार नहीं है, लेकिन वहां की राजनीति में इसे लेकर चर्चा तेज हो गई है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे। वहीं विपक्षी नेताओं ने इसे इजरायल की कूटनीतिक विफलता करार दिया है।
क्या होगा आगे?
अब सभी की नजर स्विट्जरलैंड में होने वाले औपचारिक हस्ताक्षरों पर है। यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है तो पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी अस्थिरता को कम करने में मदद मिल सकती है और वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी राहत मिल सकती है।