महंगाई ने फिर बढ़ाई चिंता
देश में महंगाई के मोर्चे पर आम जनता को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार मई 2026 में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर बढ़कर 9.68 प्रतिशत पर पहुंच गई है। अप्रैल 2026 में यह दर 8.26 प्रतिशत थी। महज एक महीने में हुई यह बढ़ोतरी सरकार और आम उपभोक्ताओं दोनों के लिए चिंता का विषय बन गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि थोक स्तर पर बढ़ी महंगाई का असर जल्द ही खुदरा बाजार में भी दिखाई दे सकता है, जिससे रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुएं और महंगी हो सकती हैं।
ईंधन और कच्चे तेल ने बढ़ाई मुश्किल
मई महीने में थोक महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह ईंधन, बिजली और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रही। आंकड़ों के मुताबिक ईंधन और बिजली श्रेणी में महंगाई दर अप्रैल के 24.89 प्रतिशत से बढ़कर मई में 30.33 प्रतिशत हो गई।
वहीं कच्चे तेल की थोक महंगाई अप्रैल के 56.31 प्रतिशत से बढ़कर मई में 61.51 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई। ऊर्जा क्षेत्र में यह तेजी पूरे बाजार पर असर डाल रही है।
होर्मुज संकट का असर
विश्लेषकों के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की प्रभावी नाकेबंदी के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ा।
इसी कारण मई के दूसरे पखवाड़े में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 7.50 रुपये प्रति लीटर तक की वृद्धि देखने को मिली थी।
खाने-पीने की चीजें भी हुईं महंगी
ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ी, जिसका असर खाद्य वस्तुओं पर भी पड़ा। मई 2026 में खाद्य वस्तुओं की थोक महंगाई बढ़कर 3.60 प्रतिशत हो गई, जबकि अप्रैल में यह 2.43 प्रतिशत थी।
फल, सब्जियां, अनाज और अन्य आवश्यक खाद्य उत्पादों की कीमतों में वृद्धि से आम परिवारों का मासिक बजट प्रभावित हो सकता है।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर भी दबाव
फैक्ट्रियों में बनने वाले उत्पादों की लागत भी बढ़ रही है। मैन्युफैक्चरिंग उत्पादों में थोक महंगाई अप्रैल के 6.68 प्रतिशत से बढ़कर मई में 7.48 प्रतिशत दर्ज की गई।
कच्चे माल और ऊर्जा लागत बढ़ने के कारण उद्योगों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है, जिसका असर उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है।
पिछले एक साल में कैसे बदली महंगाई?
| महीना | थोक महंगाई दर |
| मई 2025 | 0.39% |
| जून 2025 | -0.13% |
| जुलाई 2025 | -0.58% |
| अगस्त 2025 | 0.52% |
| सितंबर 2025 | 0.13% |
| अक्टूबर 2025 | -1.21% |
| नवंबर 2025 | -0.32% |
| दिसंबर 2025 | 0.83% |
| जनवरी 2026 | 1.81% |
| फरवरी 2026 | 2.13% |
| मार्च 2026 | 3.88% |
| अप्रैल 2026 | 8.26% |
| मई 2026 | 9.68% |
पिछले वर्ष के दौरान थोक महंगाई कई महीनों तक शून्य या नकारात्मक स्तर पर रही थी। लेकिन वर्ष 2026 की शुरुआत से इसमें लगातार तेजी देखी जा रही है। जनवरी में 1.81 प्रतिशत से शुरू हुई महंगाई मार्च में 3.88 प्रतिशत, अप्रैल में 8.26 प्रतिशत और अब मई में 9.68 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
आगे क्या होगा?
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक तेल कीमतों में कमी नहीं आती और पश्चिम एशिया की स्थिति सामान्य नहीं होती, तो आने वाले महीनों में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है। इसका असर आम आदमी की जेब, उद्योगों की लागत और देश की आर्थिक वृद्धि पर भी पड़ सकता है।