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बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर गहराया संकट, बैंकिंग सिस्टम चरमराया

नई दिल्ली। पड़ोसी देश बांग्लादेश इस समय अपने सबसे बड़े आर्थिक संकटों में से एक का सामना कर रहा है। ताजा बैंकिंग आंकड़ों के अनुसार देश का बैंकिंग सिस्टम गंभीर दबाव में है। मार्च 2026 तक बांग्लादेश के बैंकों का 5.89 लाख करोड़ टका (करीब ₹4.54 लाख करोड़) का कर्ज नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) बन चुका है। इसके साथ ही बांग्लादेश दुनिया में यूक्रेन के बाद दूसरा सबसे अधिक NPA वाला देश बन गया है।

कुल कर्ज का एक-तिहाई हिस्सा डूबा

बांग्लादेश बैंक के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक देश के कुल बैंक ऋण का 32.26 प्रतिशत हिस्सा NPA में बदल चुका है। यदि पुनर्गठित और अन्य संकटग्रस्त ऋणों को भी शामिल कर लिया जाए तो लगभग 61 प्रतिशत बैंकिंग लोन जोखिम में माना जा रहा है। यह स्थिति किसी भी देश की वित्तीय व्यवस्था के लिए बेहद गंभीर मानी जाती है।

तीन महीने में ही बढ़ा भारी डूबा कर्ज

रिपोर्ट के अनुसार केवल जनवरी से मार्च 2026 के बीच ही लगभग 31,000 करोड़ टका अतिरिक्त कर्ज NPA में बदल गया। इससे स्पष्ट है कि बैंकिंग क्षेत्र की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है और सुधार के संकेत फिलहाल दिखाई नहीं दे रहे हैं।

राजनीतिक हस्तक्षेप बना बड़ी वजह

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार बैंकों में ऋण वितरण के दौरान वित्तीय योग्यता के बजाय राजनीतिक प्रभाव और व्यक्तिगत संबंधों को प्राथमिकता दी गई। कई बड़े उद्योगपतियों और प्रभावशाली लोगों को बिना पर्याप्त सुरक्षा के भारी-भरकम लोन दिए गए। परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में कर्ज वापस नहीं लौटे और बैंकों की बैलेंस शीट कमजोर होती चली गई।

पूंजी अनुपात भी खतरनाक स्तर पर

बैंकों की वित्तीय मजबूती मापने वाला कैपिटल टू रिस्क-वेटेड एसेट्स रेशियो (CRAR) बांग्लादेश में गिरकर -2.64 प्रतिशत पर पहुंच गया है, जबकि नियमानुसार इसे कम से कम 12.5 प्रतिशत होना चाहिए। इसके विपरीत भारत का CRAR करीब 17.2 प्रतिशत, पाकिस्तान का 20.8 प्रतिशत और श्रीलंका का 19.4 प्रतिशत बताया गया है।

नए लोन देना भी होगा मुश्किल

विशेषज्ञों का मानना है कि जब बैंकों का इतना बड़ा पैसा फंस जाता है तो उनके लिए उद्योग, व्यापार और आम लोगों को नए ऋण देना कठिन हो जाता है। इससे निवेश घटता है, रोजगार प्रभावित होता है और आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ जाती है।

बढ़ता विदेशी कर्ज भी चिंता का विषय

बांग्लादेश का डेट-टू-जीडीपी अनुपात 39 प्रतिशत से अधिक हो चुका है। वहीं विश्व बैंक की अंतरराष्ट्रीय ऋण रिपोर्ट के अनुसार देश का बाहरी कर्ज बढ़कर करीब 105 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अब सरकार के बजट का बड़ा हिस्सा विकास योजनाओं के बजाय कर्ज चुकाने में खर्च हो रहा है।

आगे क्या?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बैंकिंग सुधार, सख्त ऋण नियम और राजनीतिक हस्तक्षेप पर नियंत्रण नहीं किया गया तो बांग्लादेश की आर्थिक स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। हालांकि भविष्य की स्थिति सरकार की नीतियों, वित्तीय सुधारों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगी।

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