वैश्विक तनाव और ईरान युद्ध के बीच रूस ने भारत को एक बड़ा रक्षा प्रस्ताव दिया है, जो दक्षिण एशिया की ताकत के संतुलन को बदल सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक Russia ने भारत को अपने अत्याधुनिक 5वीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट Sukhoi Su-57 की दो स्क्वाड्रन देने की पेशकश की है।
क्या है रूस का प्रस्ताव?
सूत्रों के अनुसार, इस डील के तहत भारत को करीब 36 से 40 Sukhoi Su-57 विमान मिल सकते हैं। यदि साल 2026 के अंत तक समझौता हो जाता है, तो इनकी डिलीवरी 2027-28 से शुरू होकर 2030-31 तक पूरी हो सकती है। यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब Indian Air Force अपनी 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की कमी को पूरा करने के लिए विकल्प तलाश रही है।
चीन-पाकिस्तान फैक्टर क्यों अहम?
दूसरी ओर Pakistan अपने करीबी सहयोगी China से 5th जेनरेशन फाइटर जेट हासिल करने की कोशिश में है। अगर पाकिस्तान को यह तकनीक मिलती है, तो यह भारत के लिए रणनीतिक चुनौती बन सकता है। ऐसे में रूस का यह ऑफर भारत के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है।
AMCA प्रोजेक्ट और गैप की भरपाई
भारत पहले से ही स्वदेशी 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट AMCA पर काम कर रहा है, लेकिन इसके 2030 के दशक के मध्य तक तैयार होने की संभावना है। ऐसे में Sukhoi Su-57 को एक अंतरिम समाधान के रूप में देखा जा रहा है।
Su-57 की खासियतें
Sukhoi Su-57 अपनी एडवांस तकनीक के कारण दुनिया के सबसे खतरनाक फाइटर जेट्स में गिना जाता है:
- स्टील्थ तकनीक: रडार से बचने की क्षमता
- सुपरक्रूज: बिना आफ्टरबर्नर के सुपरसोनिक स्पीड
- AESA रडार और एडवांस सेंसर
- 360 डिग्री सिचुएशनल अवेयरनेस
- मल्टी-रोल क्षमता (एयर-टू-एयर और स्ट्राइक मिशन)
- हाइपरसोनिक मिसाइल ले जाने की क्षमता
मेक इन इंडिया और HAL की भूमिका
इस संभावित डील में Hindustan Aeronautics Limited की अहम भूमिका हो सकती है। ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत भारत इन विमानों के उत्पादन को देश में ही करने की योजना बना सकता है। हालांकि इसके लिए रूस से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT) बेहद जरूरी होगा।
रूस के सामने चुनौतियां
Russia को Su-57 प्रोग्राम में कुछ तकनीकी और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा है। लेकिन उत्पादन बढ़ाने और नई तकनीक विकसित करने पर तेजी से काम चल रहा है।
निष्कर्ष
अगर यह डील फाइनल होती है, तो India की वायु शक्ति में जबरदस्त इजाफा होगा और क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन बदल सकता है। अब नजर इस बात पर है कि भारत इस प्रस्ताव को स्वीकार करता है या नहीं।