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राम मंदिर चंदा मामले पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा बयान, सीएम योगी से पूछा- ‘दूध का दूध और पानी का पानी कहां है?

अयोध्या। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने राम मंदिर चंदा मामले को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला बोला है। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले में स्पष्ट जवाब देना चाहिए और पहले घोषित की गई जांच का परिणाम जनता के सामने रखना चाहिए।

SIT जांच को लेकर उठाए सवाल

शंकराचार्य ने कहा कि चोरी की घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में कहा था कि विशेष जांच दल (SIT) गठित कर दिया गया है और “दूध का दूध और पानी का पानी” कर दिया जाएगा। उनका आरोप है कि इसके बाद इस मुद्दे पर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई।

उन्होंने कहा कि जनता आज भी यह जानना चाहती है कि जांच का अंतिम निष्कर्ष क्या रहा और उस मामले में क्या कार्रवाई हुई।

‘ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है’

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि वर्तमान सवालों का जवाब देने के बजाय वर्षों पुराने मुद्दों को सामने लाया जा रहा है। उनके अनुसार, इससे मूल प्रश्नों से लोगों का ध्यान हटाने की कोशिश हो रही है।

उन्होंने कहा कि पहले घोषित जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होनी चाहिए, उसके बाद अन्य विषयों पर चर्चा की जा सकती है।

हनुमानगढ़ी को लेकर भी उठाए सवाल

शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री के उस बयान पर भी सवाल उठाए, जिसमें हनुमानगढ़ी का उल्लेख किया गया था। उन्होंने कहा कि यदि कोई दावा किया गया है तो उसके समर्थन में प्रमाण भी प्रस्तुत किए जाने चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि हनुमानगढ़ी से जुड़ी कुछ बातें तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं और इस विषय पर सरकार को स्पष्टीकरण देना चाहिए।

महंतों से विशेष अपील करने की घोषणा

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि वह हनुमानगढ़ी जाकर वहां के महंतों से मुलाकात करेंगे और अपनी बात उनके सामने रखेंगे। उन्होंने कहा कि इस विषय पर धार्मिक परंपराओं और मर्यादाओं के अनुरूप निर्णय लिया जाना चाहिए।

राजनीतिक बयानबाजी के बीच बढ़ी चर्चा

शंकराचार्य के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, इस मामले में सरकार की ओर से इस बयान पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक और राजनीतिक विषयों से जुड़े ऐसे बयान सार्वजनिक बहस को प्रभावित करते हैं। ऐसे मामलों में आधिकारिक तथ्यों और जांच रिपोर्ट के आधार पर ही निष्कर्ष निकालना उचित होता है।

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