2027 चुनाव के लिए BSP का बड़ा दांव, आकाश आनंद करेंगे चुनाव अभियान की अगुवाई
मायावती ने भतीजे और राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद को सौंपी अहम जिम्मेदारी, 10 अगस्त से शुरू होगा चुनावी अभियान
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों में जुटी बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने बड़ा संगठनात्मक फैसला लिया है। पार्टी प्रमुख मायावती ने एक बार फिर अपने भतीजे और राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद पर भरोसा जताते हुए उन्हें विधानसभा चुनाव 2027 के प्रचार अभियान की कमान सौंपी है। पार्टी का चुनावी अभियान 10 अगस्त से हाथरस जिले की सादाबाद विधानसभा सीट से शुरू होगा।
हाथरस से होगी अभियान की शुरुआत
बसपा के कार्यक्रम के अनुसार आकाश आनंद 10 अगस्त को सादाबाद में जनसभा को संबोधित करेंगे और पार्टी के विधानसभा प्रत्याशी की घोषणा करेंगे। इसके बाद 25 अगस्त को जेवर में भी उनकी बड़ी जनसभा प्रस्तावित है। पार्टी का लक्ष्य प्रदेशभर में लगातार सभाएं कर संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करना है।
सोशल इंजीनियरिंग पर BSP का फोकस
बसपा 2007 की पूर्ण बहुमत सरकार के बाद लगातार चुनावी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में मायावती एक बार फिर सोशल इंजीनियरिंग के पुराने फार्मूले पर काम कर रही हैं। पार्टी अनुसूचित जाति के पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत करने के साथ-साथ ब्राह्मण, मुस्लिम, पिछड़ा वर्ग, वैश्य और क्षत्रिय समुदाय के बीच भी अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।
युवाओं को जोड़ने की जिम्मेदारी
पार्टी नेतृत्व का मानना है कि आकाश आनंद के जरिए युवाओं को बसपा से जोड़ने में मदद मिलेगी। संगठन स्तर पर उम्मीदवारों की घोषणा के साथ उनकी लगातार सभाएं कराई जाएंगी ताकि चुनावी माहौल पहले से तैयार किया जा सके।
403 सीटों पर तैयारी तेज
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, 403 विधानसभा सीटों में से आधे से अधिक सीटों पर उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। अब तक करीब 15 नामों पर सहमति बनने की जानकारी सामने आई है। बसपा पहले उम्मीदवारों को विधानसभा प्रभारी घोषित करती है और बाद में अधिसूचना जारी होने पर उन्हें आधिकारिक प्रत्याशी बनाती है।
राजनीतिक संदेश भी अहम
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आकाश आनंद को दोबारा बड़ी जिम्मेदारी देकर मायावती ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी में नेतृत्व का आधार अनुशासन और संगठन के प्रति प्रतिबद्धता है। वहीं विपक्ष का कहना है कि यह बसपा का आंतरिक मामला है और हर दल अपनी चुनावी रणनीति तय करने के लिए स्वतंत्र है।