E-20 पॉलिसी पर बढ़ी बहस, किसानों ने बताया क्यों है फायदेमंद
चंडीगढ़। देश में E-20 इथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। जहां एक ओर कुछ राजनीतिक दल इस नीति पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं पंजाब के किसान संगठनों ने खुलकर इसका समर्थन किया है। किसानों का कहना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम ने मक्का और गन्ना जैसी फसलों की मांग बढ़ाई है, जिससे उन्हें बेहतर कीमत और अतिरिक्त आय का अवसर मिला है। उनका मानना है कि यह नीति कृषि क्षेत्र के लिए लाभदायक साबित हो रही है और इसे बंद नहीं किया जाना चाहिए।
किसानों का दावा- मक्का और गन्ने की बढ़ी मांग
पंजाब के कृषि क्षेत्रों में किसानों का कहना है कि इथेनॉल उत्पादन के लिए मक्का और गन्ने की बढ़ती मांग ने उनकी आय में सकारात्मक बदलाव किया है। पहले जहां कई किसान पारंपरिक धान-गेहूं चक्र पर निर्भर थे, वहीं अब मक्का जैसी वैकल्पिक फसलें बेहतर मुनाफा देने लगी हैं। किसानों के अनुसार इससे खेती का जोखिम भी कम हुआ है और फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिला है।
किसान संगठनों ने जताई चिंता
माजा जोन आढ़तिया एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं किसान नरिंदर भेल का कहना है कि E-20 कार्यक्रम के विरोध से किसानों के बीच अनिश्चितता पैदा हो रही है। उनका कहना है कि यदि इस नीति को रोका गया तो मक्का की मांग और कीमत दोनों प्रभावित हो सकती हैं। इससे हजारों किसानों की आय पर सीधा असर पड़ेगा।
अकबरपुरा गांव के किसान दीदार सिंह ने बताया कि बेहतर दाम मिलने के कारण उन्होंने धान की जगह मक्का की खेती शुरू की है। वहीं भुरली गांव के किसान जगरूप सिंह और जगजीत सिंह का कहना है कि इथेनॉल संयंत्रों द्वारा मक्का की खरीद बढ़ने से छोटे किसानों को आर्थिक मजबूती मिली है।
E-20 पॉलिसी पर क्यों हो रही है राजनीति?
E-20 इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज है। कुछ नेताओं ने आशंका जताई है कि इससे पुराने वाहनों के इंजन और माइलेज पर असर पड़ सकता है। वहीं सरकार का कहना है कि E-20 ईंधन का व्यापक परीक्षण किया जा चुका है और इसका उद्देश्य कच्चे तेल के आयात को कम करना, प्रदूषण घटाना तथा किसानों के लिए नया बाजार तैयार करना है।
किसानों की सरकार से अपील
पंजाब के किसान संगठनों ने केंद्र और राज्य सरकार से अपील की है कि E-20 पॉलिसी पर राजनीति करने के बजाय किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जाए। उनका कहना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम से किसानों की आय बढ़ी है, फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिला है और कृषि क्षेत्र को नई दिशा मिली है। किसानों का मानना है कि यदि यह नीति लगातार लागू रहती है तो भविष्य में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।