UPI शुल्क को लेकर कांग्रेस और सरकार आमने-सामने
नई दिल्ली। UPI पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू करने को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 2,000 रुपये से अधिक के कुछ UPI merchant transactions पर MDR लागू करने के सरकार के फैसले की आलोचना की है। इसी बीच सरकार की ओर से यह मुद्दा उठाया गया है कि संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की रिपोर्ट में UPI के लिए एक टिकाऊ revenue model की जरूरत बताई गई थी और समिति में शामिल पांच कांग्रेस सांसदों ने रिपोर्ट के समय इस सिफारिश पर असहमति दर्ज नहीं कराई थी।
किन कांग्रेस सांसदों का नाम सामने आया?
रिपोर्टों के मुताबिक वित्त संबंधी संसदीय स्थायी समिति में पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ समेत कांग्रेस के पांच सांसद शामिल थे। सरकारी सूत्रों का कहना है कि समिति ने UPI के लिए revenue framework की जरूरत पर विचार किया और MDR जैसे विकल्पों का समर्थन करने वाली सिफारिश पर कोई dissent दर्ज नहीं हुआ।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि संसदीय समिति की किसी सिफारिश का हिस्सा होना और किसी सांसद का व्यक्तिगत रूप से किसी बाद के सरकारी फैसले का समर्थन करना एक ही बात नहीं है। मौजूदा विवाद इसी अंतर को लेकर भी राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है।
समिति ने क्यों सुझाया था revenue model?
रिपोर्टों के अनुसार समिति ने UPI ecosystem की वित्तीय स्थिरता और तकनीकी बुनियादी ढांचे की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लंबे समय के लिए एक revenue model पर विचार किया था। इसमें बड़े मूल्य वाले लेनदेन पर calibrated MDR जैसे विकल्प की चर्चा की गई थी। समिति के सामने UPI के संचालन, साइबर सुरक्षा और तकनीकी निवेश की लागत से जुड़े मुद्दे भी रखे गए थे।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने सरकार के नए UPI शुल्क ढांचे की आलोचना करते हुए इसे ‘UPI tax’ बताया और फैसले को वापस लेने की मांग की है। कांग्रेस की ओर से यह तर्क दिया गया है कि MDR का आर्थिक बोझ आगे चलकर ग्राहकों या छोटे कारोबारियों पर पड़ सकता है। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि MDR ग्राहक से सीधे वसूला जाने वाला टैक्स नहीं है और व्यवस्था में उपभोक्ताओं पर शुल्क डालने से रोकने के प्रावधान किए गए हैं।
15 अक्टूबर से लागू होने वाला नया ढांचा
रिपोर्टों के मुताबिक 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के कुछ merchant UPI transactions पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। Person-to-person यानी व्यक्ति से व्यक्ति होने वाले UPI भुगतान पर शुल्क नहीं लगाया जाएगा। छोटे कारोबारियों और कुछ आवश्यक क्षेत्रों के लिए अलग प्रावधान रखे गए हैं।
इस पूरे मामले में अब चर्चा सिर्फ UPI शुल्क की नहीं, बल्कि संसद की पुरानी समिति की सिफारिश और वर्तमान राजनीतिक रुख के बीच अंतर को लेकर भी हो रही है।