चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए AIMIM प्रमुख
नई दिल्ली। चुनाव आयोग के खिलाफ मंगलवार को INDIA गठबंधन के सांसदों द्वारा निकाले गए विरोध मार्च से AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने दूरी बनाए रखी। अब ओवैसी ने इस फैसले की वजह बताते हुए कहा है कि वह INDIA गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं, इसलिए उनके लिए इस प्रदर्शन में शामिल होने का सवाल नहीं था। उन्होंने अपने अंदाज में कहा कि यह ‘बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना’ वाली बात होती।
राहुल-प्रियंका समेत विपक्षी नेताओं ने निकाला मार्च
मंगलवार को INDIA गठबंधन से जुड़ी 19 पार्टियों के सांसदों ने संसद के मकर द्वार से चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर विरोध मार्च निकाला था। विपक्षी नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने के लिए चुनाव आयोग जाना चाहते थे।
मार्च के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई विपक्षी नेता आकाशवाणी भवन परिसर में पहुंच गए थे। वहां प्रदर्शन और धरना भी दिया गया। इस मामले को लेकर दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की है।
ओवैसी ने क्यों नहीं लिया प्रदर्शन में हिस्सा?
तेलंगाना के हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान ओवैसी से जब विरोध मार्च में शामिल नहीं होने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी INDIA गठबंधन का हिस्सा नहीं है। इसी वजह से उन्होंने प्रदर्शन से दूरी बनाई।
ओवैसी ने कहा कि वह गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं और इसी कारण प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए। उनका यह बयान अब राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है।
CEC चयन प्रक्रिया में बदलाव की मांग
विरोध मार्च से दूरी बनाने के बावजूद ओवैसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन की मौजूदा प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि CEC के चयन की व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है।
ओवैसी का सुझाव है कि मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति में सरकार के साथ-साथ विपक्ष और न्यायपालिका की भी भूमिका होनी चाहिए। उन्होंने ऐसी व्यवस्था की बात कही जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश मिलकर CEC का चयन करें।
SIR को लेकर भी ओवैसी का बयान
असदुद्दीन ओवैसी ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भी अपनी आपत्ति जताई। उन्होंने दावा किया कि यह प्रक्रिया उचित नहीं है। ओवैसी ने SIR को ‘पिछले दरवाजे से NRC’ बताया।
हालांकि, यह ओवैसी का राजनीतिक दावा है। SIR और चुनाव आयोग की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग मत सामने आते रहे हैं।
चुनाव आयोग की भूमिका पर बढ़ी राजनीतिक बहस
CEC चयन प्रक्रिया और मतदाता सूची के SIR को लेकर ओवैसी के बयान ऐसे समय आए हैं, जब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। वहीं चुनाव आयोग अपनी प्रक्रियाओं और संवैधानिक भूमिका के तहत काम करने की बात करता रहा है।
ओवैसी के INDIA गठबंधन के प्रदर्शन से अलग रहने के बयान ने इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम में एक अलग मुद्दा जोड़ दिया है।