लखन। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में 30 अक्टूबर को लखनऊ में बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जा रही है। बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों उपमुख्यमंत्री और पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल होंगे। इस बैठक को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले संगठन और सरकार की रणनीति पर मंथन के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में पार्टी संगठन की मौजूदा स्थिति की समीक्षा करना, सरकार के कामकाज पर चर्चा करना और चुनावी तैयारियों को दिशा देना है। इसमें राजनीतिक प्रस्ताव भी पेश किया जाएगा। इसके जरिए केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं, गरीब कल्याण, सुशासन और प्रमुख फैसलों को जनता तक पहुंचाने की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है।
1. मिशन-2027 के लिए तैयार होगा चुनावी रोडमैप
बीजेपी की इस बैठक का सबसे बड़ा एजेंडा आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को गति देना है। पार्टी संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाने के साथ चुनाव से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करेगी। राजनीतिक प्रस्ताव के माध्यम से सरकार की उपलब्धियों और योजनाओं को सामने रखने की रणनीति बनाई जा सकती है।
पार्टी की कोशिश होगी कि प्रदेश स्तर पर तय एजेंडे को जिला, विधानसभा और बूथ स्तर तक पहुंचाया जाए, ताकि चुनाव से पहले संगठनात्मक गतिविधियों को और मजबूत किया जा सके।
2. कमजोर बूथ और क्षेत्रों पर विशेष ध्यान
चुनावी तैयारियों में बूथ स्तर का संगठन अहम भूमिका निभाता है। इसी वजह से बैठक में उन क्षेत्रों और बूथों की समीक्षा पर जोर रहने की संभावना है, जहां पार्टी को अपनी स्थिति मजबूत करने की जरूरत है।
प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने भी ‘जहां कमजोर, वहां ज्यादा जोर’ के मंत्र पर काम करने की बात कही है। इसके तहत कमजोर क्षेत्रों में संगठनात्मक गतिविधियां बढ़ाने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और जनता से संपर्क मजबूत करने पर चर्चा हो सकती है।
3. सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने की तैयारी
बैठक में योगी सरकार के कामकाज और केंद्र सरकार की योजनाओं को भी प्रमुखता दिए जाने की संभावना है। सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण जैसे मुद्दों को राजनीतिक प्रस्ताव में शामिल किया जा सकता है।
पार्टी का प्रयास होगा कि सरकार की योजनाओं और फैसलों की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने के लिए संगठन के विभिन्न स्तरों पर अभियान चलाए जाएं। इसमें जिला और मंडल स्तर के कार्यकर्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।
4. अमित शाह की मौजूदगी के सियासी मायने
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी इस बैठक को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाती है। वह प्रदेश कार्यसमिति की बैठक का उद्घाटन करेंगे। उनके साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी तथा संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहेंगे।
अमित शाह की संगठनात्मक और चुनावी रणनीति में भूमिका को देखते हुए उनके संबोधन पर भी पार्टी कार्यकर्ताओं और राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी। बैठक का समापन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे। इसे सरकार और संगठन के बीच समन्वय के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
5. सांसदों से लेकर जिलाध्यक्षों तक होंगे शामिल
प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में केवल प्रदेश स्तर के नेता ही नहीं, बल्कि संगठन के अलग-अलग स्तरों से जुड़े पदाधिकारियों को भी आमंत्रित किया गया है। इसमें सांसद, विधायक, एमएलसी, क्षेत्रीय अध्यक्ष, जिलाध्यक्ष, जिला स्तर के पदाधिकारी और विभिन्न मोर्चों व प्रकोष्ठों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
इसके अलावा 2024 के लोकसभा और 2022 के विधानसभा चुनाव के प्रत्याशियों को भी बैठक में बुलाया गया है। प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह और प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े सहित अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी भी इसमें हिस्सा लेंगे।
तीन सत्रों में होगी बैठक
बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक तीन सत्रों में आयोजित होगी। दूसरे सत्र में राजनीतिक प्रस्ताव, चुनावी तैयारियों और संगठन से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। संगठन की गतिविधियों की समीक्षा भी एजेंडे का हिस्सा रहेगी। बैठक में शामिल होने वाले नेताओं और पदाधिकारियों का पंजीकरण क्यूआर कोड के माध्यम से किया जाएगा।
अमित शाह का प्रस्तावित कार्यक्रम
जारी कार्यक्रम के अनुसार, अमित शाह सुबह 10:45 बजे लखनऊ पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी उनका स्वागत करेंगे। इसके बाद सुबह 11:15 बजे वह प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में शामिल होकर उद्घाटन करेंगे। दोपहर बाद उनके दिल्ली रवाना होने का कार्यक्रम है।
कुल मिलाकर, लखनऊ की यह बैठक बीजेपी के लिए 2027 विधानसभा चुनाव से पहले संगठनात्मक तैयारियों की समीक्षा और आगे की दिशा तय करने का अहम अवसर है। हालांकि, चुनाव में पार्टी किन मुद्दों को प्राथमिकता देगी और बैठक में कौन-से राजनीतिक प्रस्ताव सामने आएंगे, इसकी स्पष्ट तस्वीर बैठक के बाद ही सामने आएगी।