आधार अब जन्मतिथि का प्रमाण नहीं, उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी विभागों को दिए सख्त निर्देश
उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लेते हुए राज्य के सभी विभागों को निर्देश दिया है कि वे जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में आधार कार्ड को स्वीकार करना पूरी तरह बंद कर दें। यह निर्णय भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के आधिकारिक निर्देशों के बाद लिया गया है, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि आधार जन्मतिथि का प्रमाण नहीं है और इसे जन्म प्रमाण पत्र के विकल्प के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता।

शुक्रवार को योजना विभाग के विशेष सचिव अमित सिंह बंसल ने यह आदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि राज्य में कई विभाग अब भी आधार को जन्मतिथि प्रमाण के रूप में स्वीकार कर रहे थे, जिससे न केवल भ्रम की स्थिति बन रही थी बल्कि कई मामलों में दुरुपयोग की आशंका भी जताई गई। आदेश में स्पष्ट किया गया कि आधार केवल पहचान का एक साधन है, लेकिन यह व्यक्ति के जन्म का कानूनी प्रमाण नहीं है। इस कारण अब किसी भी सरकारी विभाग, कार्यालय या संस्था में आधार को जन्म के दस्तावेज के तौर पर नहीं माना जाएगा।

विशेष सचिव द्वारा जारी पत्र में UIDAI लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा भेजे गए पत्र का भी उल्लेख है। UIDAI के पत्र क्रमांक 16013/4/2020-RO-LKO/5416 दिनांक 31.10.2025 में स्पष्ट किया गया है कि अलग-अलग राज्य विभागों द्वारा आधार को जन्म प्रमाण दस्तावेज के रूप में गलत तरीके से उपयोग किया जा रहा है, जिसे तुरंत रोका जाना आवश्यक है। इस पत्र में यह भी कहा गया कि सभी विभागों में एक समान नीति लागू हो ताकि भविष्य में किसी भी स्तर पर भ्रम या विवाद न पैदा हो।
सरकारी निर्देश के अनुसार अब जन्म प्रमाण पत्र या जन्म से संबंधित अन्य मान्य दस्तावेज ही जन्मतिथि की पुष्टि के लिए उपयोग किए जाएंगे। यह निर्णय उन सभी योजनाओं और प्रक्रियाओं को प्रभावित करेगा जहां अब तक पहचान के साथ जन्मतिथि के लिए आधार प्रस्तुत किया जाता था। जैसे—शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश, मतदाता सूची में नामांकन, सरकारी योजनाओं के सत्यापन, आयु संबंधी प्रमाण में आधार का उपयोग अब नहीं किया जा सकेगा।
इस निर्णय का एक कारण आधार से जुड़ी सुरक्षा और सत्यता को बेहतर बनाना भी है। हाल ही में UIDAI ने राष्ट्रीय पहचान डेटाबेस की सबसे बड़ी सफाई प्रक्रिया के दौरान मृत व्यक्तियों के दो करोड़ से अधिक आधार नंबर निष्क्रिय कर दिए। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि आधार का दुरुपयोग न हो और केवल जीवित व्यक्तियों के सक्रिय रिकॉर्ड ही सिस्टम में मौजूद रहें। मृत व्यक्तियों की जानकारी UIDAI को भारत के महापंजीयक, राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन, सार्वजनिक वितरण प्रणाली और राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम से प्राप्त हुई थी।
विशेषज्ञ मानते हैं कि आधार को केवल पहचान दस्तावेज के रूप में सीमित रखने से इसकी विश्वसनीयता और सटीकता में सुधार होगा। इसके साथ ही जन्म से जुड़े कानूनी दस्तावेजों को प्राथमिकता देने से भविष्य की सरकारी योजनाओं और सेवाओं में पारदर्शिता और एकरूपता बढ़ेगी।
सरकार ने सभी विभागों को सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा है कि वे अपने-अपने कार्यालयों में इस आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करें और किसी भी स्तर पर आधार को जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में स्वीकार न करें।