मुरादाबाद में अपराधियों ने एक बार फिर कानून व्यवस्था को खुली चुनौती दी है। अनुज हत्याकांड के मुख्य गवाह और पैरोकार अजय कुमार पर सरेआम फायरिंग कर उन्हें गवाही देने से रोकने की कोशिश की गई। यह सनसनीखेज हमला 25 दिसंबर की शाम छजलैट थाना क्षेत्र में हुआ, जिसने पूरे जिले में हड़कंप मचा दिया।
बाइक सवार बदमाशों ने थार को रोका, दी जान से मारने की धमकी
पीड़ित अजय कुमार अपने साथी सैफ अली के साथ थार गाड़ी से बिजनौर की ओर जा रहे थे। लौटते समय किशनपुर मोड़ के पास पीछे से आई बाइक ने उनकी गाड़ी को ओवरटेक कर रोका। बदमाशों ने गालियां देते हुए हथियार तान दिया और साफ शब्दों में धमकी दी—
“अगर अनुज के मुकदमे में गवाही दी, तो जान से मार देंगे।”
सरेआम फायरिंग, खेत में छिपकर बचाई जान
धमकी के साथ ही हमलावरों ने फायरिंग शुरू कर दी।
- एक गोली थार की ड्राइवर साइड खिड़की में लगी
- दूसरी गोली सामने के शीशे पर जा लगी
गोलियों की आवाज से इलाके में सन्नाटा छा गया। जान बचाने के लिए अजय कुमार और उनके साथी गाड़ी छोड़कर पास के गन्ने के खेत में भागे और वहीं से 112 नंबर पर पुलिस को सूचना दी।
जेल से रची गई साजिश की आशंका
पुलिस इस हमले को बेहद गंभीर मान रही है। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि अनुज हत्याकांड में जेल में बंद आरोपियों ने बाहर बैठे अपने साथियों के जरिए इस वारदात को अंजाम दिलवाया।
जेल से हुई कॉल, मुलाकातों और संपर्कों की जांच की जा रही है।
अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं, गवाह सुरक्षा पर सवाल
घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक हमलावर फरार हो चुके थे।
अब तक न तो किसी आरोपी की गिरफ्तारी हुई है और न ही ठोस सुराग सामने आए हैं। सीसीटीवी फुटेज, बाइक और हथियार की जांच की बात कही जा रही है।
इस घटना ने गवाहों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हत्या जैसे गंभीर मामलों में गवाही देने वाले लोग अगर सुरक्षित नहीं हैं, तो न्याय प्रक्रिया कैसे पूरी होगी?
पुरानी रंजिश और अनुज हत्याकांड से जुड़ा मामला
पीड़ित अजय कुमार अनुज हत्याकांड में मुख्य गवाह हैं। उन्होंने अपनी तहरीर में कमलवीर को हमले का मुख्य साजिशकर्ता बताया है।
अनुज हत्याकांड में पहले से जेल में बंद आरोपियों—ललित कौशिक, अमित, मोहित, प्रभाकर, अनिकेत और पुष्पेन्द्र—पर भी संदेह जताया गया है।
गवाह का कहना है कि गवाही पूरी होने पर सजा तय होने का डर ही इस हमले की वजह बना।
“यह हमला सिर्फ गवाह पर नहीं, न्याय व्यवस्था पर है”
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यह हमला सिर्फ अजय कुमार पर नहीं, बल्कि पूरी न्याय व्यवस्था पर सीधा हमला है। अगर गवाहों को इस तरह धमकाया जाएगा, तो सच सामने कैसे आएगा?
निष्कर्ष
मुरादाबाद की यह घटना उत्तर प्रदेश में गवाह सुरक्षा कानून की वास्तविक स्थिति को उजागर करती है। अब देखना होगा कि पुलिस कितनी तेजी से आरोपियों तक पहुंचती है और क्या गवाह को वास्तविक सुरक्षा मिल पाती है या नहीं।