Saudi Arabia–United Arab Emirates Relations:
खाड़ी क्षेत्र के दो सबसे ताकतवर मुस्लिम देश — सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) — जिनकी दोस्ती कभी मिसाल मानी जाती थी, आज खुली दुश्मनी में बदल चुकी है। अरब स्प्रिंग से लेकर यमन युद्ध तक कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले ये दोनों देश अब एक-दूसरे के खिलाफ खड़े नजर आ रहे हैं।
गल्फ रीजन के दो पिलर, अब आमने-सामने
सऊदी अरब और यूएई लंबे समय तक खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के दो मजबूत स्तंभ रहे हैं। दोनों सुन्नी मुस्लिम बहुल, राजशाही व्यवस्था वाले और तेल आधारित अर्थव्यवस्था वाले देश हैं। ईरान के बढ़ते प्रभाव को रोकना इनका साझा लक्ष्य रहा, जिसने इन्हें करीब रखा।
यमन बना टकराव का बड़ा मैदान
दोनों देशों के रिश्तों में आई दरार का सबसे बड़ा कारण बना यमन संकट। ताजा घटनाक्रम में सऊदी अरब ने यमन में UAE से जुड़े हथियारों की खेप पर हवाई हमला किया। दक्षिणी बंदरगाह शहर मुकल्ला में हुए इन हमलों के बाद हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए।
UAE को 24 घंटे का अल्टीमेटम
स्थिति तब और बिगड़ गई जब यमन की सऊदी समर्थित सरकार ने UAE की सेना को 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का अल्टीमेटम दे दिया। इसके बाद यूएई ने आनन-फानन में अपनी बची हुई सैन्य टुकड़ियों को यमन से वापस बुला लिया। यूएई के रक्षा मंत्रालय ने भी यमन से पूरी तरह हटने का ऐलान कर दिया।
दोस्ती क्यों बदली दुश्मनी में?
विशेषज्ञों के मुताबिक,
- आर्थिक प्रतिस्पर्धा
- क्षेत्रीय प्रभुत्व की होड़
- अलग-अलग कूटनीतिक रणनीतियां
इन कारणों ने दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई को गहरा किया। तेल नीति, व्यापार, कूटनीति और मुस्लिम दुनिया में नेतृत्व की दौड़ ने इस दोस्ती को दुश्मनी में बदल दिया।
कभी कैसी थी सऊदी-UAE की दोस्ती?
यूएई के अस्तित्व में आने के बाद से ही सऊदी अरब उसका सबसे बड़ा समर्थक रहा। दोनों देशों ने
- अरब स्प्रिंग
- ईरान विरोधी रणनीति
- यमन युद्ध
जैसे बड़े मुद्दों पर मिलकर काम किया। खाड़ी देशों में इनकी दोस्ती की मिसाल दी जाती थी।
आगे क्या बढ़ेगा टकराव?
अब हालात ऐसे हैं कि सऊदी अरब और यूएई सीधे टकराव की स्थिति में पहुंच चुके हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह तनाव सिर्फ खाड़ी क्षेत्र ही नहीं, बल्कि मध्य-पूर्व की राजनीति और वैश्विक तेल बाजार पर भी गहरा असर डाल सकता है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह तनाव?
भारत के लाखों प्रवासी सऊदी अरब और यूएई में काम करते हैं। साथ ही ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार के लिहाज से भी यह टकराव भारत के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है।