नई दिल्ली:
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की अमेरिकी हिरासत के बाद अब पूरी दुनिया की नजरें देश के विशाल तेल भंडार पर टिक गई हैं। माना जा रहा है कि मादुरो की गिरफ्तारी के पीछे लोकतंत्र या मानवाधिकार नहीं, बल्कि वेनेजुएला के नीचे दबा ‘काला सोना’ ही असली वजह है।
लेकिन सवाल बड़ा है—क्या डोनाल्ड ट्रंप इस ‘सोने की खान’ से वाकई तेल निकाल पाएंगे या यह अमेरिका के लिए एक नया भू-राजनीतिक दलदल साबित होगा?
जमीन के नीचे सोना, ऊपर सिर्फ कबाड़
वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक है, लेकिन हकीकत यह है कि उसका तेल उद्योग पूरी तरह जर्जर हो चुका है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति मादुरो और उनसे पहले ह्यूगो चावेज़ के शासन में भ्रष्टाचार, कुप्रबंधन और निवेश की भारी कमी ने तेल उद्योग को तबाह कर दिया।
1974 में जहां उत्पादन 40 लाख बैरल प्रतिदिन था, वहीं आज यह घटकर महज 10 लाख बैरल रह गया है।
तेल क्षेत्रों में आग लगना, चोरी, मशीनों का खराब होना और रखरखाव का अभाव आम बात हो गई है। हालत यह है कि जिन बंदरगाहों पर पहले सुपरटैंकर एक दिन में लोड हो जाते थे, अब वहां पांच-पांच दिन लग रहे हैं।
100 अरब डॉलर का जोखिम भरा दांव
विशेषज्ञों का मानना है कि वेनेजुएला से तेल निकालना अब सिर्फ तकनीकी चुनौती नहीं, बल्कि 100 अरब डॉलर का जोखिम भरा निवेश है, जिसकी सफलता की कोई गारंटी नहीं।
इसे ऐसे समझा जा सकता है—
ट्रंप के पास तिजोरी की चाबी तो है, लेकिन जिस तिजोरी में तेल बंद है, वह पूरी तरह जंग खा चुकी है।
पाइपलाइनें तक कबाड़ में बेच दी गईं
तेल ढुलाई के लिए बना विशाल पाइपलाइन नेटवर्क जगह-जगह से लीक हो रहा है। कई इलाकों में सरकारी कंपनियों ने ही पाइप उखाड़कर कबाड़ में बेच दिए।
इस पूरे ढांचे को दोबारा खड़ा करने के लिए अगले 10 वर्षों तक हर साल कम से कम 10 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत होगी।
ओरिनोको बेसिन: दुनिया का सबसे बड़ा भंडार, लेकिन अपराध का गढ़
वेनेजुएला का ओरिनोको बेसिन करीब 500 अरब बैरल तेल का घर माना जाता है। लेकिन आज यह इलाका उपेक्षा और अपराध का केंद्र बन चुका है।
- ड्रिलिंग रिग्स लावारिस पड़े हैं
- मशीनों के पुर्जे दिनदहाड़े चोरी हो रहे हैं
- काला बाजार फल-फूल रहा है
क्या अमेरिकी कंपनियां लगाएंगी पैसा?
ट्रंप प्रशासन चाहता है कि एक्सॉन मोबिल, शेवरॉन और कोनोकोफिलिप्स जैसी दिग्गज कंपनियां वेनेजुएला लौटें।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का कहना है कि वेनेजुएला का भारी कच्चा तेल अमेरिकी गल्फ कोस्ट रिफाइनरियों के लिए बेहद उपयुक्त है।
लेकिन सवाल यह है—
👉 क्या कोई कंपनी उस देश में अरबों डॉलर लगाएगी, जहां सुरक्षा और स्थिरता का नामोनिशान नहीं?
राजनीतिक अस्थिरता सबसे बड़ा रोड़ा
तेल कंपनियों को मुनाफे से पहले स्थिर सरकार और कानूनी सुरक्षा चाहिए।
मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वेनेजुएला का सत्ता ढांचा पूरी तरह डगमगा गया है। भले ही ट्रंप कह रहे हों कि अब सत्ता उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज संभाल रही हैं, लेकिन उन्हें मादुरो की करीबी माना जाता है।
पीडीवीएसए (सरकारी तेल कंपनी) के पूर्व अधिकारियों का कहना है कि जब तक नई और अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त नेशनल असेंबली नहीं बनती, कोई भी कंपनी जोखिम नहीं उठाएगी।
एक्सॉन और कोनोकोफिलिप्स का कड़वा अतीत
2000 के दशक में ह्यूगो चावेज़ ने एक्सॉन और कोनोकोफिलिप्स की संपत्तियों का राष्ट्रीयकरण कर लिया था।
इन कंपनियों को आज भी अरबों डॉलर के मुआवजे का इंतजार है। फिलहाल सिर्फ शेवरॉन एक विशेष लाइसेंस के तहत वहां काम कर रही है और कुल उत्पादन का करीब 25% संभाल रही है।
रिफाइनिंग क्षमता भी बड़ी समस्या
वेनेजुएला का कच्चा तेल बेहद गाढ़ा (Extra Heavy) होता है, जिसे रिफाइनिंग से पहले खास ‘अपग्रेडर’ यूनिट्स की जरूरत होती है।
परागुआना रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स, जो कभी दुनिया के सबसे आधुनिक संयंत्रों में था, आज लगभग बंद हो चुका है।
इसे दोबारा चालू करना नई रिफाइनरी बनाने जितना ही महंगा और कठिन माना जा रहा है।
वैश्विक बाजार भी खिलाफ
फिलहाल वैश्विक बाजार में तेल की कोई कमी नहीं है। कीमतें पांच साल के निचले स्तर के आसपास हैं। ऐसे में वेनेजुएला के महंगे और जटिल तेल में निवेश करना कंपनियों को आकर्षक नहीं लग रहा।
ट्रंप की रणनीति क्या है?
ट्रंप ने इस मिशन के लिए अपनी सबसे मजबूत टीम उतारी है।
- आंतरिक मंत्री डग बर्गम
- ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट
इनका लक्ष्य अमेरिका को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना और रूस-मध्य पूर्व पर निर्भरता कम करना है।
ट्रंप चाहते हैं कि वेनेजुएला का उत्पादन फिर से 30–40 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंचे, जिससे वैश्विक कीमतें गिरें और अमेरिका का दबदबा बढ़े।
लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक प्रतिबंध, नौसैनिक नाकेबंदी और राजनीतिक अनिश्चितता खत्म नहीं होती, तब तक यह सपना कागजों से आगे नहीं बढ़ेगा।