अन्तर्राष्ट्रीय

Iran War: होर्मुज से गुजरा LPG टैंकर ‘ग्रीन सान्वी’, भारत के लिए राहत की खबर

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। Strait of Hormuz से भारतीय ध्वज वाला एलपीजी टैंकर ‘ग्रीन सान्वी’ सुरक्षित गुजर गया है और अब भारत की ओर बढ़ रहा है। यह जहाज देश में गैस आपूर्ति को स्थिर करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

युद्ध के बीच भारत को राहत

Iran और Israel के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक तेल और गैस सप्लाई प्रभावित हुई है। ऐसे में India के लिए यह खबर राहत देने वाली है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने भारतीय ध्वज वाले जहाजों को सुरक्षित मार्ग से गुजरने की अनुमति दी है, जिसके चलते एक और एलपीजी टैंकर सफलतापूर्वक होर्मुज पार कर चुका है।

‘ग्रीन सान्वी’ कितना गैस ला रहा?

सूत्रों के मुताबिक, ‘ग्रीन सान्वी’ जहाज में करीब 44,000 मीट्रिक टन से अधिक एलपीजी होने का अनुमान है। यह मात्रा देश की आधे दिन की एलपीजी खपत के बराबर बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार भारत में रोजाना लगभग 55,000 मीट्रिक टन एलपीजी की खपत होती है। ऐसे में इस टैंकर का पहुंचना बाजार में राहत दे सकता है।

मुंबई पहुंचने का अनुमान

जहाज ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, ‘ग्रीन सान्वी’ 3 अप्रैल को होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुका है और अब Mumbai की ओर बढ़ रहा है। अनुमान है कि यह जहाज 6 अप्रैल तक मुंबई बंदरगाह पहुंच सकता है। इसके बाद एलपीजी की आपूर्ति तेजी से बढ़ने की संभावना है।

अभी भी कई जहाज इंतजार में

हालांकि, कई भारतीय तेल और गैस जहाज अभी भी होर्मुज क्षेत्र में फंसे हुए हैं और क्लीयरेंस का इंतजार कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में ‘ग्रीन आशा’ और ‘जग विक्रम’ जैसे अन्य एलपीजी टैंकर भी भारत की ओर बढ़ सकते हैं, जिससे सप्लाई और मजबूत होगी।

भारत की आयात निर्भरता

भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है, जिसमें 85 से 90 प्रतिशत सप्लाई इसी रूट से आती है। होर्मुज स्ट्रेट में व्यवधान के कारण देश के कई शहरों में एलपीजी सिलेंडर के लिए लंबी कतारें देखने को मिली थीं। सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और वैकल्पिक सप्लाई चेन पर भी काम कर रही है।

उपभोक्ताओं को राहत की उम्मीद

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अगले कुछ दिनों में और जहाज सुरक्षित पहुंचते हैं, तो एलपीजी संकट कम हो सकता है। सरकार और ऊर्जा कंपनियां आपूर्ति सामान्य करने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं।

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