मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है। ठाणे जिले के अंबरनाथ नगर परिषद में भाजपा और कांग्रेस ने एक-दूसरे के खिलाफ दशकों पुरानी सियासी लड़ाई को दरकिनार करते हुए हाथ मिला लिया है। इस अप्रत्याशित गठबंधन का मकसद शिवसेना के एकनाथ शिंदे गुट को सत्ता से दूर रखना बताया जा रहा है। इस गठबंधन में अजित पवार गुट की एनसीपी भी शामिल है, जिससे नगर परिषद की सत्ता का पूरा गणित बदल गया है।
अंबरनाथ नगर परिषद में बने इस नए गठबंधन को ‘अंबरनाथ विकास आघाड़ी’ नाम दिया गया है। कुल 32 पार्षदों के इस गठबंधन में भाजपा के 14, कांग्रेस के 12 और एनसीपी (अजित पवार गुट) के 4 पार्षद शामिल हैं। इस स्पष्ट बहुमत के दम पर भाजपा की तेजश्री करंजुले ने महापौर पद जीत लिया है। नतीजतन, शिवसेना शिंदे गुट को विपक्ष की बेंच पर बैठना पड़ा है।
इस सियासी घटनाक्रम से शिंदे गुट में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। शिंदे गुट के नेताओं ने भाजपा पर ‘पीठ में छुरा घोंपने’ का आरोप लगाया है। शिंदे गुट के विधायक डॉ. बालाजी किनिकर ने कहा कि “कांग्रेस-मुक्त भारत” का नारा देने वाली भाजपा का कांग्रेस के साथ गठबंधन करना पूरी तरह से विरोधाभासी है। वहीं, भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
भाजपा नेताओं का कहना है कि शिंदे गुट के साथ गठबंधन को लेकर कई बार बातचीत की कोशिश की गई, लेकिन कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला। ऐसे में नगर परिषद में स्थिर और विकासोन्मुख सरकार बनाने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था। हालांकि, इस गठबंधन ने महायुति और महागठबंधन दोनों में अंदरूनी तनाव बढ़ा दिया है।
इस पूरे मामले पर एकनाथ शिंदे के बेटे और सांसद श्रीकांत शिंदे का भी बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि अंबरनाथ में भाजपा और कांग्रेस का गठबंधन भाजपा का आंतरिक मामला है और इसका जवाब भाजपा नेतृत्व को देना चाहिए। साथ ही उन्होंने दोहराया कि शिवसेना हमेशा विकास की राजनीति करने वालों के साथ खड़ी रहेगी।
अंबरनाथ का यह सियासी प्रयोग आने वाले नगर निगम और विधानसभा चुनावों से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों के संकेत दे रहा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि यह गठबंधन अस्थायी साबित होता है या राज्य की राजनीति में किसी बड़े बदलाव की भूमिका बनता है।