तेहरान | 9 जनवरी 2026
ईरान एक बार फिर हिंसा और विरोध-प्रदर्शनों की आग में झुलस रहा है। बीते 12 दिनों से जारी देशव्यापी आंदोलन अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। अब तक 45 लोगों की मौत, सैकड़ों घायल और 100 से अधिक शहरों में उग्र प्रदर्शन ईरान को अराजकता की ओर धकेल रहे हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि खामेनेई सरकार ने फोन और इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह बंद कर दी हैं।
आधी रात को क्यों भड़का ईरान?
गुरुवार देर रात ईरान के कई प्रमुख शहरों—तेहरान, मशहद, ईरानशहर और बंदर अब्बास—में हिंसक झड़पें देखने को मिलीं। प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर कब्जा किया, नारेबाजी की और सरकारी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। हालात काबू से बाहर होते देख सरकार ने आनन-फानन में देशभर में इंटरनेट ब्लैकआउट लागू कर दिया, ताकि विरोध की तस्वीरें और वीडियो दुनिया तक न पहुंच सकें।
महंगाई और बेरोजगारी ने सुलगाई चिंगारी
ईरान में इस उबाल की जड़ में है गंभीर आर्थिक संकट। ईरानी मुद्रा रियाल रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच चुकी है, जबकि महंगाई दर 42 प्रतिशत के करीब है। बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और सरकारी दमन से नाराज जनता सड़कों पर उतर आई है।
यह आंदोलन 28 दिसंबर 2025 को तेहरान के बाजारों में हड़ताल से शुरू हुआ और देखते ही देखते पूरे देश में फैल गया।
45 मौतें, 8 नाबालिग भी शामिल
सरकारी आंकड़े भले ही कम मौतों की बात कर रहे हों, लेकिन ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट एजेंसियों के अनुसार अब तक 45 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है, जिनमें 8 नाबालिग भी शामिल हैं। कई जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच सीधी झड़पें हुईं, पानी की बौछारों और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया।
निर्वासित क्राउन प्रिंस की अपील से बढ़ा उबाल
ईरान से निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने लोगों से सड़कों पर उतरकर आंदोलन जारी रखने की अपील की, जिसके बाद प्रदर्शन और उग्र हो गए। हालांकि आंदोलन अब भी काफी हद तक नेतृत्वहीन है, लेकिन पहलवी की अपील ने आग में घी डालने का काम किया।
ट्रंप की फाइनल वॉर्निंग से बढ़ा वैश्विक तनाव
इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी ने हालात और संवेदनशील बना दिए हैं। ट्रंप ने कहा कि
“अगर ईरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को मारना शुरू करता है, तो अमेरिका बहुत कड़ी कार्रवाई करेगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका “Lock and Loaded” है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका-ईरान रिश्ते पहले से ही न्यूक्लियर और मिसाइल कार्यक्रम को लेकर तनावपूर्ण हैं।
क्या यह ईरान में रिजीम चेंज की शुरुआत है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंदोलन 2019 और 2022 के प्रदर्शनों से भी बड़ा साबित हो सकता है। सेना में असंतोष और डिफेक्शन की खबरें, अंतरराष्ट्रीय दबाव और बढ़ती आर्थिक बदहाली ने खामेनेई सरकार की नींव हिला दी है।
हालांकि ईरान सरकार इसे अमेरिका-इजराइल की साजिश बता रही है, लेकिन सड़कों पर उतरी भीड़ कुछ और ही कहानी कह रही है।