इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने ग्रीनलैंड को सैन्य तरीके से लेने की किसी भी संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा सैन्य कार्रवाई नाटो के लिए गंभीर परिणाम ला सकती है और ऐसा कदम किसी के हित में नहीं होगा — न अमेरिका का और न ही किसी अन्य का। यह बयान उन्होंने नए साल की प्रेस कॉन्फ़्रेंस में दिया।
मेलोनी ने स्पष्ट किया कि वह ऐसे किसी सैन्य ऑपरेशन का समर्थन नहीं करेंगी, और उनका मानना है कि वास्तविक हितों को देखते हुए ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड और समग्र आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा के लिए NATO की एक “गंभीर और महत्वपूर्ण” उपस्थिति आवश्यक है ताकि क्षेत्र में दूसरे शक्तिशाली देशों के हस्तक्षेप को रोका जा सके।
हालाँकि व्हाइट हाउस ने कुछ विकल्पों पर विचार करने की बात कही है, जिनमें ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए सैन्य बल का उपयोग भी शामिल है, मेलोनी ने कहा कि ऐसा कदम किसी के भी हित में नहीं होगा और नाटो की एकता को प्रभावित करेगा।
मेलोनी को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के यूरोप में करीबी सहयोगी के रूप में देखा जाता है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि वह सैन्य हस्तक्षेप के विचार का समर्थन नहीं करतीं और इसके स्थान पर NATO की मजबूत उपस्थिति पर ज़ोर दिया।
क्या है मुद्दा?
- व्हाइट हाउस ने ग्रीनलैंड को हासिल करने के विकल्पों पर विचार किया है, जिनमें सैन्य बल का उल्लेख भी हुआ था।
- ग्रीनलैंड रणनीतिक रूप से आर्कटिक में स्थित है, जो वैश्विक सुरक्षा, ऊर्जा संसाधन और समुद्री मार्गों के लिए अहम है।
- NATO की भूमिका को बढ़ाने की बात का लक्ष्य इस क्षेत्र में प्रतिद्वंद्वी शक्तियों (जैसे रूस और चीन) के प्रभाव को रोकना है।
मेलोनी का रुख दिखाता है कि विश्व राजनीति में आर्कटिक की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती जा रही है, और इससे जुड़े निर्णयों का नाटो और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर बड़ा असर पड़ सकता है।