दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान हुई हिंसा के मामले में अदालत ने आठ आरोपियों को 12 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। ये सभी आरोपी 21 जनवरी 2026 तक जेल में रहेंगे। अदालत ने कहा कि हिंसा के समय आरोपियों की मौजूदगी प्रथम दृष्टया स्पष्ट है, जिसके आधार पर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।
यह हिंसा रामलीला मैदान के पास फैज-ए-इलाही मस्जिद के निकट नगर निगम द्वारा चलाए जा रहे अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान भड़की थी। सोशल मीडिया पर मस्जिद गिराए जाने की अफवाह फैलने के बाद बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए और हालात बेकाबू हो गए।
अब तक 13 गिरफ्तार, CCTV से हुई पहचान
पुलिस के मुताबिक, इस मामले में एक किशोर सहित कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सभी गिरफ्तारियां CCTV फुटेज और घायल पुलिसकर्मियों की पहचान के आधार पर की गई हैं। आरोपियों के खिलाफ IPC की धारा 109 (हत्या का प्रयास), दंगा, और लोक सेवकों के काम में बाधा डालने जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।
छह पुलिसकर्मी घायल
हिंसा के दौरान छह पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कुछ जवानों को सिर और शरीर के महत्वपूर्ण हिस्सों में चोटें आई हैं। हालात को काबू में लाने के लिए अतिरिक्त बल बुलाना पड़ा।
जमानत याचिका और जेल में मारपीट का आरोप
इसी केस में पांच अन्य आरोपियों ने जमानत याचिका दायर की है। उनके वकीलों ने आरोप लगाया कि जेल परिसर में अधिकारियों ने उनके साथ मारपीट की। इस पर अदालत ने जेल अधीक्षक को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई तक आरोपियों का मेडिकल रिकॉर्ड पेश करने का आदेश दिया है।
36,000 वर्ग फुट इलाका अतिक्रमण मुक्त
दिल्ली नगर निगम के आयुक्त विवेक कुमार ने स्पष्ट किया कि अभियान के दौरान 36,000 वर्ग फुट क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है और मस्जिद को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। उन्होंने कहा कि अफवाहों के कारण स्थिति बिगड़ी, जबकि कार्रवाई पूरी तरह नियमानुसार थी।
तुर्कमान गेट हिंसा का यह मामला अब कानूनी मोड़ पर पहुंच चुका है और आने वाले दिनों में अदालत की सुनवाई से कई अहम तथ्य सामने आने की उम्मीद है।