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India-Pakistan Tension: कश्मीर से राजस्थान तक ड्रोन घुसपैठ, सरक्रीक में सैन्य जमावड़ा—क्या नई चाल चल रहे हैं आसिम मुनीर?

नई दिल्ली। India-Pakistan Tension एक बार फिर सुर्खियों में है। ऑपरेशन सिंदूर में करारी शिकस्त के बाद भी पाकिस्तान अपनी उकसावे वाली गतिविधियों से बाज नहीं आ रहा। जम्मू-कश्मीर से लेकर राजस्थान तक ड्रोन की संदिग्ध उड़ानें और गुजरात-सिंध सीमा पर स्थित सरक्रीक क्षेत्र में बढ़ता सैन्य जमावड़ा भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर संकेत हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी की सख्त चेतावनियों के बीच भारत हर मोर्चे पर पूरी तरह सतर्क है।

कश्मीर से राजस्थान तक ड्रोन अलर्ट

नए साल की शुरुआत से ही पाकिस्तान ड्रोन को “सॉफ्ट वॉर” के हथियार के तौर पर इस्तेमाल करता दिख रहा है। एलओसी और अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इलाकों—सांबा, राजौरी और पूंछ—में पाकिस्तानी ड्रोन देखे गए, जिन्हें भारतीय सेना ने समय रहते मार गिराया।
राजस्थान के जैसलमेर में रामगढ़ गैस थर्मल पावर प्लांट जैसे संवेदनशील और प्रतिबंधित क्षेत्र के ऊपर ड्रोन की मौजूदगी ने खतरे की घंटी और तेज कर दी है। आशंका है कि इन ड्रोन का उपयोग हथियार, नशीले पदार्थों की तस्करी या रेकॉन्सेंस (जासूसी) के लिए किया जा रहा है।

आर्मी चीफ की चेतावनी

सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने स्पष्ट किया है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद भी एलओसी के पास छह और अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार दो आतंकी कैंप सक्रिय हैं। उन्होंने पाकिस्तान को ड्रोन गतिविधियों पर लगाम लगाने की कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी उकसावे का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

सरक्रीक में पाकिस्तान का सैन्य जमावड़ा

जनवरी 2026 तक की रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान ने विवादित सरक्रीक क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी तेजी से बढ़ाई है। सिंध रेजिमेंट की क्रीक बटालियनों की संख्या दो से बढ़ाकर छह कर दी गई है। सुजावल, घारो और बदिन के बाद जाती और केती बंडर में नई तैनातियां हुई हैं।
इसके साथ ही, बंधा धोरा और हरामी धोरो के बीच छह नई मरीन सुरक्षा चौकियां, भोलारी फॉरवर्ड एयरबेस पर JF-17 और J-10C लड़ाकू विमान, आधुनिक रडार सिस्टम, AWACS और P-3 ओरियन समुद्री गश्ती विमानों की तैनाती से पाकिस्तान की मंशा और स्पष्ट होती है।

भारत की जवाबी तैयारी

पाकिस्तान की इन गतिविधियों के मद्देनज़र भारत ने भी तैयारियां तेज कर दी हैं। बीते अक्तूबर में तीनों सेनाओं का ट्राई-सर्विस युद्ध अभ्यास सरक्रीक के दलदली इलाकों से लेकर जैसलमेर तक किया गया। इसमें एआई ट्रैकिंग, ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम का व्यापक इस्तेमाल हुआ।
गुजरात तट पर नए कोस्ट गार्ड रडार स्टेशन, मरीन कमांडो की बढ़ी तैनाती और भुज सैन्य बेस पर आधुनिक L-70 एयर डिफेंस गन भारत की मजबूत सुरक्षा रणनीति का संकेत हैं।

क्या है सरक्रीक विवाद?

सरक्रीक भारत-पाकिस्तान के बीच कच्छ के रण में स्थित 96 किलोमीटर लंबा विवादित क्षेत्र है। यह विवाद 1914 के एक प्रस्ताव की अलग-अलग व्याख्याओं से उपजा। पाकिस्तान पूरे सरक्रीक पर दावा करता है, जबकि भारत थलवेग सिद्धांत के आधार पर सीमा को क्रीक के मध्य मानता है। भारत के पास 1925 का मानचित्र और 1924 के सीमा स्तंभ बतौर प्रमाण मौजूद हैं।

निष्कर्ष

ड्रोन घुसपैठ से लेकर सरक्रीक में सैन्य जमावड़े तक, पाकिस्तान की गतिविधियां एक संगठित रणनीति की ओर इशारा करती हैं। हालांकि, भारत की कड़ी चेतावनियों और मजबूत सैन्य तैयारियों के बीच यह स्पष्ट है कि किसी भी दुस्साहस का जवाब तुरंत और निर्णायक होगा।

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