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‘मदर ऑफ ऑल डील्स’: भारत–EU के बीच होने वाला है ऐतिहासिक ट्रेड एग्रीमेंट, बदल जाएगा दुनिया का आर्थिक नक्शा

HighLights

  • भारत और यूरोपीय संघ के बीच मेगा ट्रेड एग्रीमेंट की तैयारी
  • EU प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा – ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’
  • 2 अरब लोगों का साझा बाजार, वैश्विक GDP का करीब 25%

डिजिटल डेस्क, दावोस।
India EU Trade Deal: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच जल्द ही एक ऐतिहासिक व्यापार समझौता होने जा रहा है, जिसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है। यह डील न केवल भारत और यूरोप के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देगी, बल्कि वैश्विक व्यापार के संतुलन को भी बदल सकती है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने दावोस में इस मेगा ट्रेड एग्रीमेंट का खुलकर संकेत देकर दुनिया का ध्यान भारत की ओर खींच लिया है।

विश्व आर्थिक मंच (WEF 2026) में बोलते हुए उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने ऐलान किया कि दावोस के तुरंत बाद वे भारत दौरे पर आएंगी। उन्होंने कहा कि भारत और EU एक ऐसे ऐतिहासिक व्यापार समझौते के बेहद करीब हैं, जिसे अब ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है। यह समझौता करीब 2 अरब लोगों का साझा बाजार बनाएगा और दुनिया की कुल GDP का लगभग एक चौथाई हिस्सा कवर करेगा।

क्यों खास है भारत–EU ट्रेड डील?

यह डील ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका की टैरिफ नीतियों से यूरोपीय देश असहज हैं। ट्रंप प्रशासन के फैसलों से नाराज EU अब भारत को एक भरोसेमंद और दीर्घकालिक साझेदार के रूप में देख रहा है। यूरोप अपनी सप्लाई चेन को चीन से हटाकर भारत की ओर मोड़ना चाहता है, जिससे भारत वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग और ट्रेड हब के रूप में उभर सकता है।

कब हो सकता है ऐतिहासिक ऐलान?

उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा 26 जनवरी 2026 को भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगे। माना जा रहा है कि 27 जनवरी को होने वाले भारत–EU शिखर सम्मेलन (India-EU Summit) में इस मेगा ट्रेड डील का औपचारिक ऐलान किया जा सकता है।

भारत को क्या मिलेगा फायदा?

इस समझौते से भारत के कपड़ा, चमड़ा, फुटवियर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। वहीं, आईटी प्रोफेशनल्स और स्किल्ड वर्कफोर्स के लिए यूरोप के दरवाजे और अधिक खुलेंगे। इसके साथ ही ग्रीन एनर्जी, टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर में भी बड़े निवेश की संभावना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत–EU की यह ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ न सिर्फ अमेरिका और चीन को कड़ा संदेश देगी, बल्कि भारत को 21वीं सदी की आर्थिक महाशक्ति बनने की दिशा में और मजबूत करेगी।

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