मुरादाबाद | 23 जनवरी 2026
आज शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 को अखिल भारतीय कायस्थ महासभा (पंजीकृत) मुरादाबाद के तत्वावधान में भारत के महान क्रांतिकारी, आज़ाद हिन्द फौज के संस्थापक और अमर राष्ट्रनायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती श्रद्धा, सम्मान और राष्ट्रभक्ति के भाव के साथ मनाई गई। यह कार्यक्रम लाइनपार स्थित सुभाष पार्क में आयोजित किया गया, जहां प्रातः 11:45 बजे नेताजी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर मिष्ठान वितरण किया गया।
कार्यक्रम का नेतृत्व अखिल भारतीय कायस्थ महासभा (रजि.) मुरादाबाद के जिलाध्यक्ष डॉ. गौरव श्रीवास्तव एडवोकेट ने किया। इस अवसर पर नेताजी के विचारों, उनके संघर्ष और राष्ट्र के प्रति उनके अतुलनीय योगदान को स्मरण करते हुए एक गोष्ठी का भी आयोजन किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष डॉ. गौरव श्रीवास्तव एडवोकेट ने की, जबकि संचालन पुनीत सहाय (जिला उपाध्यक्ष) एवं शेखर भटनागर (जिला महासचिव) ने संयुक्त रूप से किया।

नेताजी के जीवन और संघर्ष पर प्रकाश
गोष्ठी को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष एवं पूर्व उपसभापति नगर निगम, पार्षद डॉ. गौरव श्रीवास्तव एडवोकेट ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को हुआ था। वे भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेताओं में से एक थे और अपने साहसिक निर्णयों, दृढ़ राष्ट्रवाद तथा अदम्य इच्छाशक्ति के लिए जाने जाते हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अंग्रेजों के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष के लिए उन्होंने जापान के सहयोग से आज़ाद हिन्द फ़ौज का गठन किया।
उन्होंने बताया कि नेताजी द्वारा दिया गया नारा “जय हिन्द” आज भी देश की पहचान है, वहीं “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा” का उद्घोष उस दौर में देशवासियों के दिलों में क्रांति की ज्वाला बनकर धधक उठा। भारतवासी उन्हें स्नेह और सम्मान से नेताजी के नाम से संबोधित करते हैं।
आज़ाद हिन्द सरकार और ऐतिहासिक उपलब्धियां
डॉ. गौरव श्रीवास्तव ने आगे बताया कि 21 अक्टूबर 1943 को नेताजी ने आज़ाद हिन्द फ़ौज के सर्वोच्च सेनापति के रूप में स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार का गठन किया। इस सरकार को जर्मनी, जापान, फ़िलीपीन्स, कोरिया, चीन, इटली, मान्चुको और आयरलैंड सहित 11 देशों ने मान्यता दी। जापान ने अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह इस अस्थायी सरकार को सौंपे, जहां नेताजी ने जाकर उनका नया नामकरण भी किया।
1944 में आज़ाद हिन्द फ़ौज ने अंग्रेजों के खिलाफ पुनः आक्रमण किया और कुछ भारतीय क्षेत्रों को अंग्रेजी शासन से मुक्त कराने में सफलता प्राप्त की। नेताजी का यह संघर्ष भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का एक स्वर्णिम अध्याय है।
आधुनिक भारत में नेताजी का सम्मान
उन्होंने बताया कि आज़ाद हिन्द सरकार के 75 वर्ष पूर्ण होने पर वर्ष 2018 में इतिहास में पहली बार भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लाल किले पर तिरंगा फहराया। इसके बाद 23 जनवरी 2021 को नेताजी की 125वीं जयंती को भारत सरकार के निर्णय के अनुसार “पराक्रम दिवस” के रूप में मनाया गया।
इसके अतिरिक्त 8 सितंबर 2022 को नई दिल्ली के राजपथ, जिसका नाम बदलकर कर्तव्यपथ किया गया, पर नेताजी की भव्य प्रतिमा का अनावरण किया गया। उनके विचार, साहस और त्याग आज भी करोड़ों भारतीयों को प्रेरणा देते हैं।
विचार और विरासत
नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने ‘द इंडियन स्ट्रगल’ नामक पुस्तक की रचना की, जो आज भी प्रत्येक भारतीय को देशभक्ति और आत्मसम्मान की प्रेरणा देती है। वे राष्ट्रवाद को मानव जाति के उच्चतम आदर्शों से प्रेरित मानते थे और ब्रिटिश शासन से भारत को मुक्त कराने के लिए उन्होंने जीवनपर्यंत संघर्ष किया।
उनका 18 अगस्त 1945 को विमान दुर्घटना में कथित रूप से हुआ रहस्यमय निधन आज भी इतिहास का एक अनसुलझा प्रश्न है, लेकिन उनके विचार और योगदान अमर हैं।
गणमान्य लोग रहे उपस्थित
इस अवसर पर अखिल भारतीय कायस्थ महासभा (पंजीकृत) के प्रांतीय उपाध्यक्ष श्री गिरिराज स्वरूप भटनागर, प्रांतीय मंत्री श्री राजीव सक्सेना, जिला प्रभारी श्री राकेश चंद्र भटनागर, वरिष्ठ चित्रांश स्वामी मुक्तेशानंद सक्सेना, श्री आर.के. आर्या, श्री विजय सिंहा, श्री पवन भटनागर, श्री शरद सक्सेना, श्री विशाल भटनागर, श्री संदीप श्रीवास्तव, श्री अजय सक्सेना, श्री संदीप सक्सेना, श्री सुबोध नारायण श्रीवास्तव, श्री आलोक माथुर, श्री नीतीश सिंहा, श्री निवेश भटनागर, श्री आशीष सक्सेना, श्री विकास श्रीवास्तव, श्री आकाश भटनागर, प्रिंस भटनागर, वंश भटनागर, सारथी सक्सेना सहित दर्जनों की संख्या में चित्रांश समाज के लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन नेताजी सुभाष चंद्र बोस के विचारों को आत्मसात करने और राष्ट्रहित में कार्य करने के संकल्प के साथ किया गया।