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Crude Oil Price: 107 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल, मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच क्या भारत में बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। Iran, United States और Israel के बीच जारी संघर्ष के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आया है।

सोमवार, 9 मार्च को वैश्विक बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें 107 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं, जिससे पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ने की आशंका तेज हो गई है।

क्रूड ऑयल में 17% तक उछाल

सप्ताह की शुरुआत में ट्रेडिंग शुरू होते ही तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला।

अमेरिकी बेंचमार्क WTI Crude Oil करीब 17.23% उछलकर 106.56 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। वहीं ग्लोबल बेंचमार्क Brent Crude भी 15.35% की बढ़त के साथ 106.92 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है।

पिछले साढ़े तीन साल में यह पहली बार है जब कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर के पार पहुंची है।

सप्लाई चेन पर मंडरा रहा खतरा

तेल की कीमतों में तेजी की बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और इजरायल ने ईरान के तेल डिपो पर हमले किए हैं, जिसके जवाब में ईरान ने क्षेत्र के कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।

सबसे बड़ी चिंता Strait of Hormuz को लेकर है। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल की सप्लाई इसी समुद्री रास्ते से गुजरती है और ईरान ने इसे बंद करने की चेतावनी दी है।

यदि यह मार्ग बंद हुआ तो वैश्विक तेल सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है।

ट्रंप का बयान

इस बीच Donald Trump ने कहा है कि तेल की कीमतों में आया उछाल अस्थायी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करने के लिए यह एक छोटी कीमत है और जल्द ही कीमतें नीचे आ सकती हैं।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर से ऊपर बनी रहती हैं तो पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ सकती है।

क्या भारत में महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?

भारत के लिए फिलहाल राहत की खबर सामने आई है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक वैश्विक बाजार में उथल-पुथल के बावजूद फिलहाल देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना कम है।

भारत ने हाल के वर्षों में अपने ऊर्जा स्रोतों को विविध बनाया है और रणनीतिक तेल भंडार भी मजबूत किया है। इसी वजह से वैश्विक संकट के बावजूद फिलहाल भारतीय उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर पड़ने की संभावना कम बताई जा रही है।

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