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होर्मुज संकट पर ट्रंप की NATO को चेतावनी, बोले— सहयोग नहीं मिला तो गठबंधन का भविष्य ‘बहुत बुरा’!

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने North Atlantic Treaty Organization (NATO) सहयोगी देशों को कड़ा संदेश दिया है। ट्रंप ने कहा है कि अगर नाटो देश Strait of Hormuz की सुरक्षा में सक्रिय भूमिका नहीं निभाते हैं, तो गठबंधन का भविष्य “बहुत बुरा” हो सकता है।

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है।

NATO देशों को ट्रंप की सख्त चेतावनी

ट्रंप ने कहा कि दुनिया के कई देश होर्मुज के रास्ते होने वाले तेल व्यापार से लाभ उठाते हैं, इसलिए इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल अमेरिका की नहीं हो सकती।

उन्होंने साफ कहा कि जो देश इस समुद्री मार्ग से फायदा उठा रहे हैं, उन्हें क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए सुरक्षा प्रयासों में योगदान देना चाहिए।

ट्रंप के अनुसार यदि सहयोगी देश इस मुद्दे पर पीछे हटते हैं या सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं देते हैं, तो इससे नाटो की विश्वसनीयता पर गंभीर असर पड़ सकता है।

वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर खतरा

होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और अरब सागर को जोड़ने वाला बेहद अहम समुद्री मार्ग है। दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।

हाल के दिनों में Iran और पश्चिमी देशों के बीच तनाव बढ़ने के कारण इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही और सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यहां स्थिति और बिगड़ती है, तो वैश्विक तेल सप्लाई और कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है।

कूटनीतिक कार्यक्रमों में बदलाव के संकेत

ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और सहयोगी देशों की प्रतिक्रिया के आधार पर वे अपने कूटनीतिक कार्यक्रमों और उच्च-स्तरीय बैठकों में बदलाव कर सकते हैं।

उनका कहना है कि सुरक्षा साझेदारी तभी मजबूत होती है जब सभी सदस्य देश समान रूप से जिम्मेदारी निभाएं।

क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। यह मार्ग Saudi Arabia, United Arab Emirates, Kuwait और अन्य खाड़ी देशों से निकलने वाले तेल को एशिया, यूरोप और अमेरिका तक पहुंचाने का मुख्य रास्ता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक अगर इस मार्ग में बाधा आती है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल हो सकती है और तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।

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