खाड़ी क्षेत्र में फिर बढ़ा तनाव
पश्चिम एशिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्तों में शामिल Strait of Hormuz के पास अचानक दो जहाजों के संपर्क से बाहर होने की खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। इराक की पोर्ट अथॉरिटी के अनुसार बोलीविया के झंडे वाले दो जहाज “ब्रिज-1” और “ब्रिज-2” से अचानक संपर्क टूट गया।
घटना के बाद समुद्री नियंत्रण एजेंसियों और सर्च-एंड-रेस्क्यू टीमों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। क्षेत्र में पहले से ही ईरान और अमेरिका के बीच तनाव जारी है, ऐसे में इस घटनाक्रम ने खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।
सैटेलाइट से समंदर में खोजबीन जारी
इराकी अधिकारियों के मुताबिक दोनों जहाज इराकी जलक्षेत्र में दाखिल नहीं हुए थे, लेकिन कई बंदरगाहों और जहाज मालिकों की तरफ से संपर्क टूटने की सूचना मिली थी।
अधिकारियों ने बताया कि जहाजों की तरफ से कोई डिस्ट्रेस कॉल भी नहीं भेजी गई। फिलहाल सैटेलाइट ट्रैकिंग सिस्टम और क्षेत्रीय समुद्री एजेंसियों की मदद से उनकी तलाश की जा रही है।
समुद्री विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज क्षेत्र में लगातार बढ़ते तनाव और हाल के महीनों में जहाजों पर हुए हमलों के कारण यह मामला और गंभीर हो गया है।
होर्मुज क्यों है इतना अहम?
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ा हिस्सा तेल इसी रास्ते से दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक अगर इस क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ती है तो उसका असर वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।
NATO की भूमिका पर फ्रांस ने जताई आपत्ति
इसी बीच होर्मुज की सुरक्षा में NATO की संभावित भूमिका को लेकर भी नई बहस शुरू हो गई है।
हाल ही में NATO के एक वरिष्ठ कमांडर ने संकेत दिया था कि संगठन होर्मुज की समुद्री सुरक्षा में संभावित योगदान पर विचार कर सकता है। हालांकि इस पर अभी कोई आधिकारिक योजना सामने नहीं आई थी।
लेकिन फ्रांस ने इस संभावना को लेकर साफ इनकार कर दिया। फ्रांस के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता पास्कल कॉन्फाव्रू ने कहा कि “मध्य पूर्व और होर्मुज NATO का क्षेत्र नहीं है।”
फ्रांस ने क्या कहा?
फ्रांस का कहना है कि वह पहले से ही बहुराष्ट्रीय मिशन के जरिए क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षा में सहयोग कर रहा है, लेकिन NATO को सीधे इस विवाद में शामिल करना सही नहीं होगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फ्रांस का यह बयान पश्चिमी देशों के बीच भी रणनीतिक मतभेद को दर्शाता है। आने वाले दिनों में होर्मुज की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।