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आयुष्मान भारत योजना में कैंसर इलाज का बड़ा विस्तार? 5 लाख से बढ़कर 25 लाख तक कवरेज का प्रस्ताव!

भारत में कैंसर के बढ़ते मामलों और महंगे इलाज को देखते हुए Ayushman Bharat Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana के तहत कैंसर कवरेज बढ़ाने का प्रस्ताव सामने आया है। एक नए अध्ययन में सुझाव दिया गया है कि वर्तमान 5 लाख रुपये की वार्षिक सीमा को बढ़ाकर 5 साल के लिए 25 लाख रुपये की ‘रिवॉल्विंग सीलिंग’ कर दिया जाए।

यह प्रस्ताव ‘फिनकैन’ नामक अध्ययन में दिया गया है, जिसका नेतृत्व All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) दिल्ली के विशेषज्ञों ने किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे लाखों कैंसर मरीजों को महंगे इलाज से राहत मिल सकती है।

क्या है नया प्रस्ताव?

अध्ययन के मुताबिक कैंसर का इलाज कई वर्षों तक चलता है और मौजूदा 5 लाख रुपये की सालाना सीमा कई बार पर्याप्त नहीं होती।

इसी वजह से नई नीति के तहत ये सुझाव दिए गए हैं:

  • 5 साल के लिए 25 लाख रुपये की रिवॉल्विंग लिमिट
  • गंभीर कैंसर मरीजों के लिए 10 लाख रुपये का अतिरिक्त टॉप-अप
  • शुरुआती सालों में ज्यादा खर्च की अनुमति ताकि मरीज तुरंत इलाज करा सके

विशेषज्ञों का कहना है कि इससे इलाज में देरी कम होगी और मरीजों को बेहतर उपचार मिल सकेगा।

लाखों मरीजों को मिला फायदा

2018 में शुरू हुई Ayushman Bharat Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana देश की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में से एक है।

अध्ययन के मुताबिक अब तक इस योजना के तहत:

  • 68 लाख से अधिक कैंसर उपचार कवर किए जा चुके हैं
  • कुल खर्च लगभग 13,000 करोड़ रुपये रहा है

यह योजना खासतौर पर ग्रामीण और कम आय वाले परिवारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई है।

इलाज जल्दी शुरू होने की संभावना बढ़ी

मेडिकल जर्नल The Lancet के अनुसार इस योजना के कारण कैंसर की पहचान होने के बाद 30 दिनों के भीतर इलाज शुरू होने की संभावना में 90% तक वृद्धि देखी गई है।

हालांकि अध्ययन में यह भी बताया गया है कि डायग्नोस्टिक टेस्ट पर अभी भी कुल लागत का सिर्फ 3% खर्च होता है, जो अक्सर योजना के दायरे से बाहर रह जाता है।

इलाज के लिए ज्यादा बजट की जरूरत

फिलहाल आयुष्मान भारत योजना में कैंसर इलाज के लिए सालाना लगभग 7,700 करोड़ रुपये का बजट है।

लेकिन ‘फिनकैन’ मॉडल के मुताबिक यदि मरीजों को सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी और फॉलो-अप सहित पांच साल का पूरा इलाज उपलब्ध कराया जाए तो सालाना करीब 33,000 करोड़ रुपये की जरूरत पड़ेगी।

विशेषज्ञों की राय

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ बजट बढ़ाना ही समाधान नहीं है, बल्कि सही समय पर जांच और स्मार्ट खर्च भी उतना ही जरूरी है।

अध्ययन के अनुसार यदि समय पर निदान और इलाज सुनिश्चित किया जाए तो:

  • हर साल लगभग 1,500 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है
  • करीब 1,560 अतिरिक्त लोगों की जान बचाई जा सकती है

सरकार के नए कदम

केंद्र सरकार ने भी कैंसर उपचार को बेहतर बनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं।

Narendra Modi सरकार ने केंद्रीय बजट 2025-26 में:

  • जिला अस्पतालों में 200 नए डे-केयर कैंसर केंद्र बनाने
  • जीवनरक्षक दवाओं पर सीमा शुल्क कम करने

जैसे कदम उठाने की घोषणा की है।

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