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ईरान की 4 शर्तें सुनकर हिल गया अमेरिका! क्या ट्रंप मानेंगे सब कुछ?

ईरान की शर्तों से शांति वार्ता में अड़चन

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच Donald Trump और Iran के बीच संभावित शांति वार्ता अब मुश्किल दौर में पहुंचती नजर आ रही है। युद्ध के 26वें दिन ईरान ने अमेरिका के सामने ऐसी सख्त शर्तें रख दी हैं, जिन पर सहमति बनना फिलहाल बेहद कठिन माना जा रहा है।

क्या हैं ईरान की मुख्य मांगें?

तेहरान ने स्पष्ट किया है कि बिना ठोस गारंटी के वह किसी भी समझौते के लिए तैयार नहीं होगा। ईरान की प्रमुख मांगों में अमेरिका और इजरायल से भविष्य में किसी भी सैन्य कार्रवाई न करने की लिखित गारंटी शामिल है। इसके अलावा युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई की भी मांग की गई है।

सबसे संवेदनशील मुद्दा Strait of Hormuz को लेकर है, जहां ईरान पूर्ण नियंत्रण चाहता है। यह वैश्विक तेल सप्लाई का अहम मार्ग है, जिससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है।

मिसाइल प्रोग्राम और प्रतिबंधों पर रुख सख्त

ईरान ने साफ कर दिया है कि उसके बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन प्रोग्राम पर कोई प्रतिबंध स्वीकार नहीं होगा। साथ ही उसने यह भी मांग रखी है कि उस पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंध पूरी तरह हटाए जाएं।

खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बंद करने और इजरायल द्वारा हिजबुल्लाह पर हमले रोकने की शर्तें भी इस सूची में शामिल हैं। इन मांगों से साफ है कि ईरान इस बार किसी भी तरह का समझौता कमजोर स्थिति में नहीं करना चाहता।

ट्रंप के दावों को ईरान ने किया खारिज

हाल ही में Donald Trump ने दावा किया था कि बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है, लेकिन ईरान ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया। तेहरान का कहना है कि कोई सीधी वार्ता नहीं हो रही, बल्कि केवल मध्यस्थ देशों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है।

ईरान का आरोप है कि अमेरिका पहले भी दो बार समझौतों से पीछे हट चुका है, जिससे उसका भरोसा कमजोर हुआ है।

जंग के बीच जारी हमले और बढ़ती चिंता

शांति वार्ता की कोशिशों के बीच जमीनी हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। Hezbollah द्वारा रॉकेट हमले और इजरायल की जवाबी कार्रवाई ने तनाव और बढ़ा दिया है।

तेल की कीमतें भी 94 से 97 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी हुई हैं, जिससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ रही है।

भारत की भूमिका और वैश्विक असर

इस बीच Narendra Modi ने अमेरिका से बातचीत कर Strait of Hormuz को सुरक्षित रखने और जल्द शांति स्थापित करने की अपील की है। भारत के लिए यह क्षेत्र ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह संघर्ष वैश्विक संकट का रूप ले सकता है।

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