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नासिक में ढोंगी बाबा का काला सच: महिलाओं को पिलाता था संदिग्ध तरल!

महाराष्ट्र के Nashik में खुद को ‘गॉडमैन’ बताने वाले Ashok Kharat के खिलाफ चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी महिलाओं को बहलाने-फुसलाने के लिए संदिग्ध तरल पदार्थ पिलाता था, जिसके बाद उनके साथ शोषण की घटनाएं होती थीं।

यह मामला अब पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गया है और अंधविश्वास के नाम पर हो रहे अपराधों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

संदिग्ध ‘खट्टा पानी’ बना जांच का केंद्र

जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर महिलाओं को एक खारा या कड़वा तरल पदार्थ पिलाता था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसे पीने के बाद पीड़ित महिलाओं को चक्कर आने लगते थे, जिससे वे असहाय हो जाती थीं।

फिलहाल पुलिस इस तरल पदार्थ की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इसमें क्या मिलाया जाता था और इसका शरीर पर क्या असर होता है।

कोर्ट ने बढ़ाई हिरासत, SIT कर रही जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने आरोपी की हिरासत बढ़ा दी है। सत्र न्यायालय ने उसे 14 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

पूरे मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) द्वारा की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी अभी तक जांच में पूरी तरह सहयोग नहीं कर रहा है और उसकी संपत्तियों व अन्य गतिविधियों की भी जांच जारी है।

ऑफिस से मिला 20 फीट लंबा ‘सांप’

जांच के दौरान आरोपी के ऑफिस से एक 20 फीट लंबा रिमोट कंट्रोल से चलने वाला सांप बरामद हुआ है। पुलिस का मानना है कि इसका इस्तेमाल लोगों को डराने और अपनी कथित ‘अलौकिक शक्तियों’ का भ्रम पैदा करने के लिए किया जाता था।

यह खुलासा बताता है कि कैसे आरोपी ने अंधविश्वास का सहारा लेकर लोगों को अपने जाल में फंसाया।

बढ़ती शिकायतें और गंभीर आरोप

Maharashtra Police के मुताबिक, आरोपी के खिलाफ अब तक कम से कम 10 FIR दर्ज हो चुकी हैं, जिनमें अधिकांश मामले यौन शोषण और दुष्कर्म से जुड़े हैं।

इसके अलावा, SIT को 100 से अधिक शिकायतें भी प्राप्त हुई हैं, जिनकी जांच की जा रही है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में और भी पीड़ित सामने आ सकते हैं।

समाज के लिए बड़ा सबक

यह मामला केवल एक व्यक्ति का अपराध नहीं, बल्कि अंधविश्वास और झूठे ‘गॉडमैन’ पर आंख बंद करके विश्वास करने के खतरों को भी उजागर करता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में लोगों को जागरूक होना चाहिए और किसी भी तरह के दावे पर बिना जांच के भरोसा नहीं करना चाहिए।

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