अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) एक बार फिर वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया है। ईरान ने दावा किया है कि उसने इस अहम समुद्री मार्ग पर अपना नियंत्रण कड़ा कर दिया है। इसी बीच भारतीय जहाजों पर IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) की फायरिंग की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
भारतीय जहाजों पर फायरिंग, बदलना पड़ा रास्ता
सूत्रों के मुताबिक, कच्चे तेल और गैस से भरे लगभग 14 जहाजों का काफिला होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहा था, तभी IRGC ने उन्हें रोक दिया। इस दौरान दो जहाजों पर गोलीबारी की गई, जिसके बाद कई जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ा।
भारत ने इस घटना पर सख्त प्रतिक्रिया देते हुए नई दिल्ली में ईरान के राजदूत को तलब कर विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय ने व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है।
क्या IRGC ले रही है अपने फैसले?
इस घटना के बाद बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या IRGC ईरान की नागरिक सरकार से अलग होकर फैसले ले रही है?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऐसा है, तो यह स्थिति और अधिक खतरनाक हो सकती है, क्योंकि इससे कूटनीतिक संवाद कमजोर पड़ सकता है।
वैश्विक व्यापार पर असर
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। यहां से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने का मतलब है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। अगर यह मार्ग लंबे समय तक बाधित रहा, तो इसका सीधा असर भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों पर पड़ेगा।
समुद्र में बढ़ी हलचल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट
ब्रिटिश मैरीटाइम एजेंसियों के मुताबिक, IRGC की गनबोट्स ने न सिर्फ गोलीबारी की बल्कि एक कंटेनर शिप पर प्रोजेक्टाइल से हमला भी किया। इससे जहाज को नुकसान पहुंचा है। कई जहाजों को रेडियो संदेश भेजकर इस मार्ग से दूर रहने की चेतावनी दी गई है।
🇮🇳 भारत के लिए क्या मायने?
भारत के लिए यह स्थिति बेहद संवेदनशील है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर इस मार्ग पर निर्भर है।
सरकार अब वैकल्पिक मार्गों और कूटनीतिक प्रयासों पर विचार कर रही है।