मुरादाबाद में VHP नेता डॉ. राजकमल गुप्ता का बड़ा बयान, विपक्षी दलों पर साधा निशाना
मुरादाबाद में तमिलनाडु के नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन द्वारा सनातन धर्म को लेकर दिए गए विवादित बयान पर विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। VHP के वरिष्ठ पदाधिकारी डॉ. राजकमल गुप्ता ने कहा कि “सनातन धर्म को खत्म करने की बात करने वाले खुद समाप्त हो जाएंगे, क्योंकि सनातन अजन्मा और करोड़ों वर्ष पुराना है।”
उन्होंने कहा कि सनातन धर्म भारत की आत्मा है और इसे किसी राजनीतिक बयान या विचारधारा से समाप्त नहीं किया जा सकता। डॉ. गुप्ता ने दावा किया कि जो लोग सनातन का विरोध करते हैं, जनता उन्हें समय के साथ जवाब देती है।
“सनातन का विरोध करने वालों को जनता ने सत्ता से बाहर किया”
VHP नेता डॉ. राजकमल गुप्ता ने कहा कि सनातन विरोधी सोच रखने वाले नेताओं और दलों को जनता ने नकार दिया है। उन्होंने कहा कि “आज वे लोग सत्ता से बाहर होकर विपक्ष में बैठने को मजबूर हैं। यह सनातन का विरोध करने का परिणाम है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल केवल वोट बैंक की राजनीति के लिए हिंदू आस्था और परंपराओं पर सवाल उठाते हैं। उनके अनुसार देश की जनता अब इस राजनीति को समझ चुकी है।
कांग्रेस, सपा और ममता सरकार पर लगाए आरोप
डॉ. राजकमल गुप्ता ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और ममता बनर्जी पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इन दलों ने वर्षों तक हिंदू समाज की भावनाओं की अनदेखी की और केवल विशेष वर्ग की राजनीति की।
उन्होंने कहा कि अब देश में हिंदूवादी सोच की सरकार है और आने वाले समय में देश के बच्चों को सही और वास्तविक इतिहास पढ़ाया जाएगा। उनके मुताबिक, इतिहास में जिन तथ्यों को वर्षों तक दबाया गया, उन्हें अब सामने लाने का काम किया जा रहा है।
मुरादाबाद नगर निगम की तारीफ
VHP नेता ने मुरादाबाद नगर निगम द्वारा किए जा रहे कार्यों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि नगर निगम शहर में ऐतिहासिक तथ्यों और भारतीय संस्कृति को सामने लाने का प्रयास कर रहा है, जो सराहनीय है।
उन्होंने अन्य नगर निगमों और स्थानीय निकायों को भी मुरादाबाद से प्रेरणा लेने की सलाह दी। डॉ. गुप्ता ने कहा कि देश के हर शहर में भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं को सम्मान देने की जरूरत है।
राजनीतिक बयान पर फिर तेज हुई बहस
उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म पर दिए गए बयान के बाद देशभर में राजनीतिक और धार्मिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। कई हिंदू संगठनों ने बयान का विरोध किया है, जबकि विपक्षी दलों के बीच भी इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दे आने वाले समय में राजनीति का बड़ा केंद्र बन सकते हैं। वहीं, सोशल मीडिया पर भी इस बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।