चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। डीएमके प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री M. K. Stalin ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री Joseph Vijay के नेतृत्व वाली सरकार कभी भी गिर सकती है। स्टालिन ने पार्टी कार्यकर्ताओं से संभावित समय से पहले विधानसभा चुनावों के लिए तैयार रहने की अपील की है।
स्टालिन का यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य में TVK सरकार को लेकर लगातार राजनीतिक चर्चाएं चल रही हैं। उन्होंने कहा कि “हार अस्थायी होती है और डीएमके पहले भी कई बार वापसी कर चुकी है। हमें फिर से जनता के बीच जाकर मजबूत होकर लौटना होगा।”
कार्यकर्ताओं को दिया बड़ा संदेश
डीएमके प्रमुख ने सोमवार को पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि तमिलनाडु में “सूरज कभी अस्त नहीं होगा”, जो कि डीएमके का चुनाव चिन्ह है। उन्होंने पार्टी की चुनावी हार की जिम्मेदारी खुद लेते हुए कहा कि वह इस असफलता के लिए जवाबदेह हैं।
गौरतलब है कि स्टालिन अपनी पारंपरिक कोलाथुर सीट भी हार गए थे। इसके बावजूद उन्होंने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाते हुए कहा कि पार्टी जल्द ही मजबूती से वापसी करेगी।
क्यों लग रही सरकार गिरने की संभावना?
डीएमके सूत्रों के अनुसार, मौजूदा सरकार कई सहयोगी दलों के समर्थन पर टिकी हुई है। अगर VCK, CPI, CPM और IUML जैसे दल समर्थन वापस लेते हैं, तो सरकार संकट में आ सकती है।
इसके अलावा AIADMK के बागी विधायकों को लेकर भी राजनीतिक स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। अगर स्पीकर या अदालत की ओर से इन विधायकों को अयोग्य घोषित किया जाता है, तो विधानसभा का समीकरण बदल सकता है।
हालांकि TVK सूत्रों का कहना है कि सरकार पूरी तरह सुरक्षित है और उसके पास बहुमत बनाए रखने के लिए पर्याप्त संख्या बल मौजूद है।
सोशल मीडिया पर फोकस बढ़ाने की सलाह
स्टालिन ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को सोशल मीडिया पर ज्यादा सक्रिय रहने की भी सलाह दी। उन्होंने इशारों में कहा कि TVK इस मामले में काफी आगे निकल चुकी है।
उन्होंने कहा कि पहले राजनीति की चर्चा चाय की दुकानों पर होती थी, लेकिन अब सोशल मीडिया राजनीतिक माहौल तय कर रहा है। ऐसे में पार्टी को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर और मजबूत उपस्थिति बनानी होगी।
हार की समीक्षा के लिए बनाई कमेटी
डीएमके ने चुनावी हार के कारणों की समीक्षा करने के लिए 36 सदस्यों की एक समिति भी गठित की है। यह समिति जनता से फीडबैक लेकर पार्टी की कमजोरियों का विश्लेषण करेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम डीएमके की खोई हुई जमीन वापस पाने की रणनीति का हिस्सा है। तमिलनाडु की राजनीति में TVK के उभरने से द्रविड़ राजनीति का पुराना समीकरण पूरी तरह बदलता दिखाई दे रहा है।