उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच बिजली कटौती का मुद्दा अब राजनीतिक रंग लेने लगा है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने प्रदेश में हो रही बिजली कटौती को लेकर भारतीय जनता पार्टी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक गीत साझा करते हुए प्रदेश की बिजली व्यवस्था पर सवाल उठाए।
बिजली संकट को लेकर लिखा व्यंग्यात्मक गीत
अखिलेश यादव ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा कि भाजपा शासन में बिजली भी “गर्मी की छुट्टियों” पर चली गई है। उन्होंने एक गीत के माध्यम से जनता की परेशानियों को व्यक्त करने की कोशिश की। गीत की प्रमुख पंक्तियां थीं, “न बिजली जले, न पंखा चले, गर्मी में जनता दिन-रात जले।”
सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि सरकार बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत में लोगों को लगातार बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है। उनके अनुसार भीषण गर्मी में बिजली कटौती ने आम लोगों का जीवन मुश्किल बना दिया है।
कई जिलों से सामने आ रही शिकायतें
प्रदेश के कई जिलों से लंबे समय तक बिजली कटौती की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। नोएडा, कानपुर, पीलीभीत और अन्य शहरों में लोगों ने बिजली आपूर्ति बाधित होने पर नाराजगी जताई है। कई स्थानों पर नागरिकों ने प्रदर्शन भी किए और नियमित बिजली आपूर्ति की मांग उठाई।
गर्मी के मौसम में बढ़ती बिजली मांग के बीच लगातार पावर कट से लोगों को घरों, दुकानों और छोटे व्यवसायों में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण बताई जा रही है।
मंत्री संजय गंगवार का बयान भी चर्चा में
हाल ही में एक वीडियो चर्चा का विषय बना, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री Sanjay Gangwar बिजली कटौती को लेकर अधिकारियों को फटकार लगाते दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों में ऐसी स्थिति देखने को नहीं मिली थी। इस बयान के बाद बिजली व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई।
मुख्यमंत्री ने दिए सुधार के निर्देश
वहीं दूसरी ओर, Yogi Adityanath ने बिजली आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। सरकार का कहना है कि तकनीकी कमियों को दूर कर उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
बिजली कटौती बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा
आगामी राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी तैयारियों के बीच बिजली कटौती का मुद्दा विपक्ष के लिए सरकार को घेरने का बड़ा हथियार बनता दिखाई दे रहा है। वहीं सरकार लगातार व्यवस्था सुधारने और बिजली आपूर्ति सामान्य करने के दावे कर रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और अधिक चर्चा का केंद्र बन सकता है।