नई दिल्ली/यूरोप। यूरोप इस समय कई वर्षों की सबसे गंभीर हीटवेव का सामना कर रहा है। लगातार बढ़ते तापमान ने सामान्य जनजीवन के साथ-साथ परिवहन, बिजली और स्वास्थ्य सेवाओं को भी प्रभावित कर दिया है। कई देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है, जबकि जर्मनी में अधिकतम तापमान 41.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किए जाने की खबर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 21 जून के बाद से गर्मी से जुड़ी 1,300 से अधिक अतिरिक्त मौतों की सूचना सामने आई है।
जर्मनी में गर्मी से बिगड़ी परिवहन व्यवस्था
जर्मनी में भीषण गर्मी का असर सबसे अधिक परिवहन व्यवस्था पर देखने को मिला। राजधानी बर्लिन सहित कई इलाकों में सड़कों की सतह क्षतिग्रस्त होने और कुछ स्थानों पर ट्राम की पटरियों के प्रभावित होने की खबरें सामने आईं। अत्यधिक तापमान के कारण हाईवे के कुछ हिस्सों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा।
रेल सेवा संचालित करने वाली डॉयचे बान (Deutsche Bahn) ने यात्रियों से गैर-जरूरी रेल यात्राएं टालने की अपील की है। कंपनी का कहना है कि रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के कारण रेलवे के बुनियादी ढांचे पर भारी दबाव है।
कई देशों में टूटे तापमान के रिकॉर्ड
यूरोप के कई देशों में इस बार गर्मी ने पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
- डेनमार्क में वर्ष 1874 के बाद पहली बार तापमान 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा।
- स्विट्जरलैंड के बेसल शहर में 38.8 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।
- चेक गणराज्य में तापमान 40.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।
- ब्रिटेन में जून महीने का अब तक का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह हीटवेव हाल के वर्षों की सबसे गंभीर मौसमीय घटनाओं में शामिल हो सकती है।
फ्रांस और इटली में भी बढ़ी मुश्किलें
फ्रांस में अत्यधिक गर्मी के कारण बिजली उत्पादन और परिवहन सेवाओं पर असर पड़ा है। पेरिस के सार्वजनिक अस्पतालों में आपातकालीन व्यवस्था लागू कर दी गई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, गर्मी से जुड़ी समस्याओं को लेकर मेडिकल हेल्पलाइन पर आने वाली कॉल में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
वहीं इटली ने रोम, मिलान, वेनिस, फ्लोरेंस और बोलोन्या सहित 18 शहरों में रेड हीट अलर्ट जारी किया है। प्रशासन ने लोगों से दोपहर के समय घरों में रहने और पर्याप्त पानी पीने की अपील की है।
WHO ने दी गंभीर चेतावनी
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडहानोम घेब्रेयेसस ने कहा कि अत्यधिक गर्मी को अक्सर “साइलेंट किलर” कहा जाता है क्योंकि इसका प्रभाव धीरे-धीरे लेकिन बेहद घातक होता है। WHO के अनुसार, यूरोप में 21 जून के बाद से गर्मी से जुड़ी 1,300 से अधिक अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बुजुर्ग, छोटे बच्चे और पहले से बीमार लोग हीट स्ट्रेस और डिहाइड्रेशन के सबसे अधिक जोखिम में हैं।
जलवायु परिवर्तन पर फिर बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ती हीटवेव और रिकॉर्ड तापमान जलवायु परिवर्तन के प्रभावों की गंभीरता को दर्शाते हैं। उनका कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए मजबूत बुनियादी ढांचे, बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रभावी आपदा प्रबंधन की आवश्यकता होगी।