राजधानी दिल्लीराष्ट्रीय

शिक्षा मंत्री बनने के बाद प्रह्लाद जोशी का पहला बयान, बोले- पूरी क्षमता और ईमानदारी से निभाऊंगा जिम्मेदारी!

नई दिल्ली | 26 जुलाई 2026

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिलने के बाद उन्होंने अपनी पहली प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी उनके लिए केवल एक मंत्रालय का कार्यभार नहीं, बल्कि देश के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण दायित्व है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह अपनी पूरी क्षमता, ईमानदारी और समर्पण के साथ इस जिम्मेदारी का निर्वहन करेंगे।

प्रह्लाद जोशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन पर जताए गए विश्वास को वह पूरी निष्ठा के साथ निभाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन को आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

प्रधानमंत्री का जताया आभार

अपने पहले सार्वजनिक बयान में प्रह्लाद जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देकर विश्वास व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में चल रहे सुधारों को गति देना और विद्यार्थियों के हितों को प्राथमिकता देना उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल होगा।

उन्होंने कहा कि शिक्षा देश के विकास की आधारशिला है और सरकार इसी सोच के साथ आगे बढ़ रही है।

धर्मेंद्र प्रधान के कार्यों की सराहना

प्रह्लाद जोशी ने पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कार्यों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए गए हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की शुरुआत हुई है।

उन्होंने कहा कि इन सुधारों को आगे बढ़ाना और नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से लागू करना उनकी प्राथमिकता होगी।

कैसे मिला शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार?

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। इससे पहले वह उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का कार्यभार संभाल रहे थे। अब उनके पास शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी होगी।

परीक्षा सुधार सबसे बड़ी चुनौती

हाल के महीनों में परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता, प्रतियोगी परीक्षाओं और कथित पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर देशभर में व्यापक चर्चा रही है। कई छात्र संगठनों ने परीक्षा सुधारों की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किए।

ऐसे समय में नए शिक्षा मंत्री के सामने परीक्षा प्रणाली को और अधिक पारदर्शी बनाना, तकनीकी सुधारों को लागू करना तथा छात्रों का भरोसा मजबूत करना प्रमुख चुनौतियों में माना जा रहा है।

आगे किन मुद्दों पर रहेगी नजर?

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन, डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, उच्च शिक्षा सुधार और छात्रों के हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं।

हालांकि इन सुधारों की दिशा और समयसीमा को लेकर सरकार की ओर से अभी कोई विस्तृत रोडमैप जारी नहीं किया गया है। आने वाले दिनों में शिक्षा मंत्रालय की प्राथमिकताओं और नई नीतिगत घोषणाओं पर सभी की नजर रहेगी।

सरकार का फोकस शिक्षा सुधार पर

प्रह्लाद जोशी के पहले बयान से संकेत मिलता है कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति को आगे बढ़ाने और शिक्षा व्यवस्था को अधिक आधुनिक, पारदर्शी एवं छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में काम जारी रखेगी। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि परीक्षा सुधार, तकनीकी बदलाव और शिक्षा से जुड़े अन्य अहम मुद्दों पर मंत्रालय आगे क्या कदम उठाता है।

Related posts

दतिया उपचुनाव: समर्थकों के हंगामे पर बोले नरोत्तम मिश्रा, कहा- पार्टी के फैसले का सम्मान करें, हिंसा से बचें

News Author

सपा-कांग्रेस गठबंधन में बढ़ी तल्खी? इमरान मसूद के बयान के बाद दोनों दलों में तेज हुई सियासी बयानबाजी!

News Author

केदारनाथ यात्रा अस्थायी रूप से रोकी गई, भारी बारिश और IMD के अलर्ट के बाद प्रशासन सतर्क!

News Author

Leave a Comment