पटना | 26 जुलाई 2026
बिहार बंद के दौरान हुई हिंसा के मामले में जनशक्ति जनता दल के प्रमुख और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव की कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं। पटना पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में बेउर जेल भेज दिया है। पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109 सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया है। यह मामला 20 जुलाई के बिहार बंद के दौरान हुई हिंसक घटनाओं से जुड़ा बताया जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, NEET परीक्षा से जुड़े मुद्दों, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग और छात्रों पर कथित लाठीचार्ज के विरोध में बिहार बंद का आह्वान किया गया था। प्रदर्शन के दौरान पटना के गांधी मैदान क्षेत्र में बड़ी संख्या में समर्थक जुटे।
इसी दौरान प्रदर्शन उग्र हो गया और पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प और पथराव की घटनाएं सामने आईं। पुलिस का आरोप है कि इस हिंसा में कई पुलिसकर्मी घायल हुए और कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई।
पुलिस ने क्या आरोप लगाए हैं?
पटना पुलिस का आरोप है कि तेज प्रताप यादव प्रदर्शन के दौरान मौके पर मौजूद थे और उन्होंने कथित तौर पर ऐसी गतिविधियों में भूमिका निभाई, जिससे हिंसा और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ी। इन्हीं आरोपों के आधार पर उनके खिलाफ BNS की धारा 109 सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेने के बाद अदालत में पेश किया, जहां से 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में बेउर जेल भेज दिया गया।
बचाव पक्ष ने गिरफ्तारी पर उठाए सवाल
तेज प्रताप यादव के अधिवक्ता जगन्नाथ सिंह ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया और एफआईआर दर्ज किए जाने के समय को लेकर कई कानूनी प्रश्न हैं।
बचाव पक्ष का दावा है कि गिरफ्तारी पहले की गई, जबकि एफआईआर बाद में दर्ज हुई। वकील के अनुसार, अदालत में जमानत की मांग की गई थी, लेकिन न्यायालय ने न्यायिक हिरासत का आदेश दिया। अब सोमवार को जमानत याचिका दाखिल की जाएगी।
धारा 109 में क्या प्रावधान है?
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109 हत्या के प्रयास से संबंधित प्रावधानों में शामिल है। यदि अदालत में अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित कर देता है, तो दोषी पाए जाने पर कानून के अनुसार कठोर सजा का प्रावधान है।
हालांकि, किसी भी आपराधिक मामले में अंतिम निर्णय अदालत द्वारा साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर किया जाता है। जब तक अदालत दोष सिद्ध नहीं करती, तब तक आरोपी को कानून की नजर में दोषी नहीं माना जाता।
आगे क्या होगा?
अब इस मामले में सभी की नजर सोमवार को दायर होने वाली जमानत याचिका और आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर रहेगी। अदालत में पुलिस अपने साक्ष्य प्रस्तुत करेगी, जबकि बचाव पक्ष गिरफ्तारी और लगाए गए आरोपों को चुनौती देगा।
इस मामले ने बिहार की राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है। विभिन्न राजनीतिक दल अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। आने वाले दिनों में अदालत की कार्यवाही और पुलिस जांच इस मामले की दिशा तय करेगी।
नोट: यह समाचार पुलिस द्वारा लगाए गए आरोपों और बचाव पक्ष के दावों पर आधारित है। तेज प्रताप यादव के खिलाफ लगाए गए आरोप अभी न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं। अदालत द्वारा दोष सिद्ध होने तक उन्हें कानूनी रूप से दोषी नहीं माना जा सकता।