177 साइबर केस दर्ज, 312 आरोपी गिरफ्तार, ड्रोन और डिजिटल इंटेलिजेंस से पुलिस की बड़ी कार्रवाई
मथुरा। उत्तर प्रदेश का धार्मिक शहर मथुरा अब तेजी से साइबर अपराध के बड़े केंद्र के रूप में उभर रहा है। संगठित ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों के कारण इसे अब ‘मिनी जामताड़ा’ कहा जाने लगा है। पिछले एक वर्ष में पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी के 177 मामले दर्ज किए हैं और 312 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि मथुरा के कई गांवों से देशभर में ऑनलाइन ठगी का नेटवर्क संचालित किया जा रहा था।
ड्रोन और पुलिस ने एक साथ मारा छापा
7 जुलाई को पुलिस ने ड्रोन की मदद से मथुरा के कई गांवों में बड़ी कार्रवाई की। खेतों और संकरी गलियों में भाग रहे संदिग्धों का पीछा किया गया। लंबी पूछताछ के बाद 42 लोगों को गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई गृह मंत्रालय के डिजिटल इनपुट और साइबर इंटेलिजेंस के आधार पर की गई।
18 गांव बने साइबर अपराध के हॉटस्पॉट
पुलिस ने गोवर्धन, बरसाना, शेरगढ़, छाता और कोसी थाना क्षेत्र के 18 गांवों की पहचान की है, जहां से संगठित साइबर अपराध संचालित होने की आशंका है। ये गांव राजस्थान और हरियाणा की सीमा के नजदीक स्थित हैं, जिससे अपराधियों को राज्य बदलकर फरार होने में आसानी मिलती है।
7000 मोबाइल नंबर और 1400 बैंक खाते जांच के दायरे में
जांच के दौरान पुलिस ने लगभग 7000 मोबाइल नंबर और 1400 बैंक खातों को ट्रैक किया है। ये नंबर और खाते विभिन्न राज्यों में दर्ज साइबर ठगी की शिकायतों से जुड़े पाए गए हैं। पुलिस के अनुसार गिरोह में अलग-अलग टीम काम करती हैं, जिनकी जिम्मेदारियां भी अलग होती हैं।
OLX, होटल बुकिंग और QR कोड से होती थी ठगी
साइबर ठग लोगों को OLX पर खरीद-बिक्री, फर्जी होटल बुकिंग वेबसाइट, QR कोड स्कैन, एडवांस भुगतान और अन्य ऑनलाइन तरीकों से निशाना बनाते थे। बातचीत के लिए टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाता था ताकि पुलिस की निगरानी से बचा जा सके।
युवाओं को आसान कमाई का लालच
जांचकर्ताओं के अनुसार इस नेटवर्क में बड़ी संख्या में स्थानीय युवाओं को आसान और जल्दी पैसा कमाने का लालच देकर शामिल किया गया। कई आरोपी पढ़ाई या सामान्य रोजगार छोड़कर साइबर अपराध का हिस्सा बन गए। पुलिस लगातार छापेमारी और डिजिटल निगरानी के जरिए इस नेटवर्क को खत्म करने में जुटी है।