नई दिल्ली। सोशल मीडिया कंपनी Meta इन दिनों कई मोर्चों पर दबाव का सामना कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े एक वीडियो को हटाए जाने के बाद भारत सरकार ने कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों से जवाब मांगा है। इसी बीच कंपनी के तिमाही नतीजे उम्मीद से कमजोर आने के कारण अमेरिकी शेयर बाजार में भी निवेशकों ने Meta के शेयरों की बिकवाली तेज कर दी है। इन दोनों घटनाओं ने कंपनी की कारोबारी स्थिति को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
भारत सरकार की सख्ती से बढ़ी चिंता
भारत Meta के लिए दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल बाजारों में से एक है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म पर करोड़ों भारतीय सक्रिय हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि यदि भारत सरकार कंपनी पर कोई कड़ा नियामकीय कदम उठाती है या बड़ा जुर्माना लगाती है, तो इसका असर कंपनी के यूजर बेस और विज्ञापन आय पर पड़ सकता है।
सरकार ने हालिया घटनाक्रम के बाद Meta से जवाब मांगा है और प्लेटफॉर्म पर कंटेंट मॉडरेशन को लेकर स्पष्टता चाही है। इस कारण निवेशकों के बीच भी कंपनी के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ी है।
कमजोर तिमाही नतीजों से निवेशकों में निराशा
Meta की दूसरी तिमाही (Q2) के वित्तीय परिणाम भी बाजार की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए। कंपनी का राजस्व बढ़ा, लेकिन प्रति शेयर मुनाफा अनुमान से कम रहा। इसके बाद अमेरिकी बाजार में Meta के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई।
विशेषज्ञों के अनुसार सबसे अधिक चिंता फ्री कैश फ्लो में आई भारी गिरावट को लेकर है। इससे यह संकेत मिला कि कंपनी की नकदी स्थिति पहले की तुलना में कमजोर हुई है।
AI पर भारी खर्च बना बड़ी चुनौती
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि Meta इस समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और भविष्य की तकनीकों पर बड़े स्तर पर निवेश कर रही है। कंपनी डेटा सेंटर, AI मॉडल और इंफ्रास्ट्रक्चर पर अरबों डॉलर खर्च कर रही है।
हालांकि यह निवेश भविष्य की रणनीति का हिस्सा है, लेकिन फिलहाल इससे कंपनी के खर्च में तेज बढ़ोतरी हुई है। इसके कारण ऑपरेटिंग मार्जिन और मुनाफे पर दबाव देखने को मिला है।
Reality Labs का घाटा भी चिंता का कारण
Meta की वर्चुअल रियलिटी यूनिट Reality Labs लगातार घाटे में चल रही है। रिपोर्टों के मुताबिक इस डिवीजन में अब तक कंपनी को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। निवेशकों का मानना है कि यदि इस क्षेत्र में जल्द लाभ नहीं दिखता, तो कंपनी की वित्तीय स्थिति पर दबाव बना रह सकता है।
कानूनी खर्च और छंटनी का असर
Meta को हाल के महीनों में कानूनी मामलों पर भी बड़ा खर्च करना पड़ा है। इसके अलावा कर्मचारियों की छंटनी के कारण कंपनी को भारी सेवरेंस पैकेज देना पड़ा, जिससे अल्पकालिक बचत का लाभ सीमित हो गया।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में Meta के सामने सबसे बड़ी चुनौती भारत जैसे महत्वपूर्ण बाजारों में भरोसा बनाए रखना और AI निवेश को लाभदायक बनाना होगी। यदि कंपनी नियामकीय चुनौतियों और बढ़ते खर्च पर नियंत्रण नहीं कर पाती है, तो निवेशकों की चिंता और बढ़ सकती है।