मुंबई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल से जुड़े कथित मॉर्फ्ड और एआई जनरेटेड वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने के मामले में महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट्स और डिजिटल सामग्री की जांच की जा रही है।
शिकायत में क्या कहा गया?
पुलिस के अनुसार, शिकायत भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक सोशल मीडिया पदाधिकारी की ओर से दर्ज कराई गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का कथित रूप से मॉर्फ्ड या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किया गया वीडियो साझा किया गया।
शिकायतकर्ता का दावा है कि वीडियो में पीयूष गोयल को ऐसे बयान देते हुए दिखाया गया, जो उन्होंने वास्तविक रूप से नहीं दिए थे।
फेसबुक पोस्ट और अन्य कंटेंट भी जांच के दायरे में
शिकायत के मुताबिक, ‘महाराष्ट्र धर्म’ नाम के एक फेसबुक अकाउंट से एक वीडियो साझा किया गया, जिसके कैप्शन में दावा किया गया कि पीयूष गोयल ने CJP प्रदर्शनकारियों को “सार्वजनिक रूप से फांसी” देने की बात कही है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि मूल वीडियो और वायरल वीडियो की तुलना करने पर यह सामग्री डिजिटल रूप से छेड़छाड़ की हुई या AI तकनीक से तैयार की गई प्रतीत हुई।
इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कथित मॉर्फ्ड तस्वीर, इंस्टाग्राम पर प्रसारित आपत्तिजनक वीडियो और अन्य सोशल मीडिया पोस्ट भी जांच के दायरे में शामिल किए गए हैं।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?
महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं तथा सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
पुलिस अब उन सोशल मीडिया अकाउंट्स की पहचान करने का प्रयास कर रही है, जिनसे कथित रूप से यह सामग्री साझा की गई थी। साथ ही डिजिटल फोरेंसिक जांच भी की जा रही है।
फर्जी कंटेंट पर बढ़ी निगरानी
हाल के समय में AI आधारित मॉर्फ्ड वीडियो और डीपफेक कंटेंट को लेकर चिंता बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी सामग्री गलत सूचना फैलाने और जनमत को प्रभावित करने का माध्यम बन सकती है। इसी कारण साइबर एजेंसियां सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले संदिग्ध कंटेंट की निगरानी बढ़ा रही हैं।
नोट: यह मामला दर्ज शिकायत और पुलिस की प्रारंभिक जांच पर आधारित है। वायरल वीडियो की प्रामाणिकता और आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।