रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की मांग को लेकर राजधानी रांची में छात्रों का आंदोलन लगातार तेज हो रहा है। इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता देवेंद्र महतो ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की सलाह पर केवल पानी पिया है, लेकिन उनका भूख हड़ताल अभी भी जारी है।
भ्रामक खबरों का किया खंडन
देवेंद्र महतो ने कहा कि कुछ स्थानों पर यह गलत जानकारी प्रसारित की जा रही है कि उन्होंने अपना अनशन समाप्त कर दिया है। उन्होंने इसे पूरी तरह भ्रामक बताते हुए कहा कि उन्होंने केवल स्वास्थ्य कारणों से जल ग्रहण किया है और यह फैसला भी सोनम वांगचुक से हुई बातचीत के बाद लिया गया।
उन्होंने कहा कि जब तक सरकार छात्रों की मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा। साथ ही उन्होंने समर्थकों से आंदोलन की गरिमा बनाए रखने और अफवाहों से बचने की अपील भी की।
पांचवें दिन बिगड़ी तबीयत, फिर भी आंदोलन जारी
भूख हड़ताल के पांचवें दिन देवेंद्र महतो ने बताया कि लगातार कमजोरी बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि बोलने में कठिनाई हो रही है, उठने-बैठने के लिए सहारे की जरूरत पड़ रही है, लेकिन मानसिक रूप से वह पूरी तरह मजबूत हैं और छात्रों के अधिकारों की लड़ाई जारी रखेंगे।
डॉक्टरों की निगरानी में उनका स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया। उनका ब्लड प्रेशर पहले काफी कम था, हालांकि अब उसमें कुछ सुधार बताया जा रहा है।
सोनम वांगचुक ने दी पानी पीने की सलाह
देवेंद्र महतो के अनुसार, सोनम वांगचुक ने वीडियो कॉल के माध्यम से उन्हें सलाह दी कि जल का त्याग करना आत्मघाती कदम हो सकता है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी भी अपने अनशन के दौरान पानी ग्रहण करते थे।
इसी सलाह के बाद देवेंद्र महतो ने पानी पीना शुरू किया, लेकिन उन्होंने दोहराया कि यह भूख हड़ताल समाप्त करने का संकेत नहीं है। उनका उद्देश्य आत्महत्या करना नहीं, बल्कि सरकार का ध्यान छात्रों की समस्याओं की ओर आकर्षित करना है।
छात्रों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
छात्रों ने झारखंड सरकार को 16 सूत्रीय प्रस्ताव सौंपा है। इनमें प्रमुख मांगें शामिल हैं—
- JPSC 2023 और 2025 बैकलॉग भर्ती से जुड़ी विवादित परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच।
- कथित अनियमितताओं की CBI जांच कराने की मांग।
- प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया पूरी तरह सरकारी एजेंसियों से कराने की व्यवस्था।
- भर्ती प्रक्रिया और चयन प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाना।
- JPSC और JSSC में निष्पक्ष एवं गैर-राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले अधिकारियों की नियुक्ति।
सरकार के जवाब का इंतजार
छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था के लिए है। अब सभी की निगाहें झारखंड सरकार की अगली प्रतिक्रिया और छात्रों के साथ होने वाली संभावित वार्ता पर टिकी हैं।