नई दिल्ली। रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर अमेरिका की प्रस्तावित टैरिफ नीति को लेकर भारत में सियासत तेज हो गई है। अमेरिकी सीनेट ने भारत समेत पांच देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने वाले बिल को भारी बहुमत से मंजूरी दी है। इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी के संयोजक और पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है।
केजरीवाल ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भारत की नीतियों और फैसलों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रभाव बढ़ गया है। उन्होंने केंद्र सरकार की विदेश और व्यापार नीति को लेकर कई सवाल भी उठाए।
केजरीवाल ने मोदी सरकार पर क्या कहा?
अरविंद केजरीवाल ने अपने पोस्ट में आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका और राष्ट्रपति ट्रंप के दबाव में काम कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि देश के छोटे-बड़े फैसलों में ट्रंप का हस्तक्षेप बढ़ गया है। केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर अमेरिका के सामने झुकने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ट्रंप की हर बात मानते हैं, चाहे वह सही हो या गलत। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका की नीतियों से भारत के हित प्रभावित हो रहे हैं।
हालांकि, ये राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें केजरीवाल के बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
अमेरिकी सीनेट ने पास किया टैरिफ बिल
अमेरिकी सीनेट ने रूस और उसके पेट्रोलियम उत्पादों के प्रमुख खरीदार देशों पर दबाव बढ़ाने वाले विधेयक को 86-11 वोटों से मंजूरी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक इस बिल का उद्देश्य रूस से होने वाले ऊर्जा व्यापार पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है। बिल का नाम ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ बताया गया है। प्रस्ताव में रूस से तेल और गैस के प्रमुख खरीदार देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान शामिल है।
किन देशों पर है नजर?
बिल में रूस से तेल और गैस के प्रमुख खरीदारों के तौर पर चीन, भारत, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया का उल्लेख किया गया है। हालांकि, महत्वपूर्ण बात यह है कि सीनेट से बिल पास होना कानून बनने की अंतिम प्रक्रिया नहीं है। इसे आगे अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से मंजूरी और फिर राष्ट्रपति की स्वीकृति की जरूरत होगी।
भारत पर क्या हो सकता है असर?
अगर प्रस्तावित टैरिफ व्यवस्था कानून बनती है और भारत पर इसका इस्तेमाल किया जाता है, तो अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले भारतीय सामान पर भारी शुल्क लग सकता है। इससे भारतीय निर्यातकों की लागत बढ़ने और अमेरिका के बाजार में प्रतिस्पर्धा प्रभावित होने की आशंका हो सकती है। भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रूस से कच्चे तेल की खरीद भारत की ऊर्जा जरूरतों का एक अहम हिस्सा है।
ईरान पर भी सख्ती का प्रावधान
रूस से जुड़े प्रतिबंधों के अलावा बिल में ईरान को लेकर भी प्रावधान शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 1996 के ईरान प्रतिबंध अधिनियम की अवधि को 2031 तक बढ़ाने का प्रस्ताव है। इस कानून के तहत ईरान के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों पर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है।
भारत में बढ़ी राजनीतिक हलचल
अमेरिकी सीनेट के इस फैसले के बाद भारत में विपक्ष ने केंद्र सरकार की विदेश नीति और अमेरिका के साथ संबंधों को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। केजरीवाल का बयान भी इसी राजनीतिक बहस का हिस्सा है।
अब सभी की नजर अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की अगली कार्रवाई और राष्ट्रपति ट्रंप के संभावित फैसले पर है। फिलहाल भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू नहीं हुआ है और आगे की अमेरिकी विधायी प्रक्रिया के बाद ही इसकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।