648 अस्पताल योजना से बाहर, 61 पर निलंबन की कार्रवाई
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराने के लिए योगी सरकार ने आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पतालों पर सख्ती बढ़ा दी है। इलाज में लापरवाही, निर्धारित मानकों का पालन नहीं करने और वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में वर्ष 2020 से 2026 तक 866 अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
सरकार की कार्रवाई में सबसे बड़ी संख्या उन अस्पतालों की है, जिन्हें आयुष्मान योजना के पैनल से बाहर किया गया। आंकड़ों के मुताबिक, 648 अस्पतालों का डी-इम्पैनलमेंट किया गया है। वहीं 61 अस्पतालों को योजना से निलंबित किया गया। इसके अलावा 17 अस्पतालों की कुछ विशेषताओं का डी-इम्पैनलमेंट किया गया, जबकि 140 अस्पतालों पर आर्थिक दंड लगाया गया।
2026 में 318 अस्पतालों पर कार्रवाई
स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज की सीईओ अर्चना वर्मा के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों को गुणवत्तापूर्ण इलाज मिलने को लेकर गंभीर हैं। इसी नीति के तहत वर्ष 2026 में अब तक 318 अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
इनमें 242 अस्पतालों को भारत सरकार के निर्धारित 35 संकेतकों को पूरा नहीं करने के कारण योजना से बाहर किया गया। 61 अस्पतालों को निलंबित किया गया, जबकि 15 अस्पतालों की विशेषताओं का डी-इम्पैनलमेंट किया गया।
कई वर्षों से जारी है अस्पतालों पर कार्रवाई
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में 16 अस्पतालों पर कार्रवाई हुई। वर्ष 2024 में 27, वर्ष 2023 में 203, वर्ष 2022 में 41, वर्ष 2021 में 44 और वर्ष 2020 में 77 अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी।
इससे साफ है कि आयुष्मान योजना के तहत अस्पतालों की निगरानी लगातार की जा रही है। सरकार का फोकस सिर्फ अस्पतालों की संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि योजना के तहत मरीजों को निर्धारित गुणवत्ता का इलाज उपलब्ध कराने पर भी है।
140 अस्पतालों पर 8.53 करोड़ रुपये से ज्यादा जुर्माना
वित्तीय वर्ष 2025-26 में 60 अस्पतालों पर करीब 3.45 करोड़ रुपये की पेनाल्टी लगाई गई। इसमें से 3.19 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली की जा चुकी है।
वहीं वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 80 अस्पतालों पर करीब 5.07 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इनमें से 1.17 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली हो चुकी है। दोनों वित्तीय वर्षों को मिलाकर 140 अस्पतालों पर कुल 8.53 करोड़ रुपये से अधिक की पेनाल्टी लगाई गई, जिसमें 4.37 करोड़ रुपये से ज्यादा की वसूली हो चुकी है।
डाटा एनालिटिक्स से पकड़ी जा रही गड़बड़ियां
आयुष्मान योजना की स्टेट एंटी फ्रॉड यूनिट डाटा एनालिटिक्स के जरिए संदिग्ध मामलों की पहचान कर रही है। इनमें एक ही मरीज को बार-बार भर्ती दिखाना, एक जैसी रिपोर्ट भेजना और ओपीडी मरीज को आईपीडी में भर्ती दिखाने जैसे मामले शामिल हैं।
सरकार का कहना है कि मानकों का उल्लंघन करने और मरीजों के इलाज में लापरवाही बरतने वाले अस्पतालों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। पेनाल्टी के बाद भी यदि अस्पताल निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ निलंबन जैसी कठोर कार्रवाई की जा सकती है।
आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच उपलब्ध कराना है। ऐसे में अस्पतालों की निगरानी और अनियमितताओं पर कार्रवाई को योजना की पारदर्शिता और मरीजों के हित से जोड़कर देखा जा रहा है।