वंदे मातरम को लेकर बढ़ा सियासी विवाद
नई दिल्ली। राष्ट्रगीत वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि पार्टी के कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल दो पैरा ही गाए जाएंगे। वहीं, बीजेपी ने कांग्रेस के इस फैसले पर तीखा हमला बोलते हुए इसे पुरानी राजनीतिक गलती दोहराने वाला कदम बताया है।
कांग्रेस ने पार्टी कार्यक्रमों के लिए साफ किया रुख
कांग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद के मुताबिक, सरकारी कार्यक्रमों में सरकार द्वारा बनाए गए नियमों का पालन किया जाएगा और वहां निर्धारित तरीके से राष्ट्रगीत गाया जाएगा। हालांकि, कांग्रेस के अपने पार्टी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के दो पैरा ही गाए जाएंगे।
यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब गोवा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की मौजूदगी में आयोजित कार्यक्रम में वंदे मातरम के छह पैरा में से केवल दो पैरा गाए गए। इसके बाद बीजेपी ने कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाए।
स्वतंत्रता दिवस पर भी उठा था मुद्दा
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले पर वंदे मातरम के पूरे संस्करण के गायन को लेकर भी चर्चा हुई। इसके बाद कांग्रेस कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम को लेकर बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस पर निशाना साधा। बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस राष्ट्रगीत के सम्मान के मामले में दोहरा रवैया अपना रही है।
हालांकि, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बीजेपी पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस को बीजेपी से देशभक्ति का प्रमाण लेने की जरूरत नहीं है। उनका तर्क है कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भी कई स्वतंत्रता सेनानियों ने वंदे मातरम के दो पैरा ही गाए थे।
बीजेपी ने 90 साल पुरानी गलती का लगाया आरोप
बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी करीब 90 साल पहले की राजनीतिक गलती को दोहरा रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह रुख राजनीतिक दबाव और वोट बैंक की राजनीति से जुड़ा हुआ है।
महाराष्ट्र कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नाना पटोले ने भी बीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बीजेपी कांग्रेस को देशभक्ति का पाठ न पढ़ाए। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता नेतृत्व के निर्देशों के अनुसार ही कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत गाएंगे।
वंदे मातरम पर विवाद का ऐतिहासिक संदर्भ
वंदे मातरम की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत राष्ट्रीय चेतना और आजादी की भावना का महत्वपूर्ण प्रतीक बना। समय के साथ इसके कुछ हिस्सों के सार्वजनिक गायन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस भी सामने आती रही है।
अब कांग्रेस के ताजा ऐलान के बाद वंदे मातरम एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। एक तरफ कांग्रेस अपने पार्टी कार्यक्रमों में दो पैरा गाने के फैसले पर कायम है, वहीं बीजेपी इसे राष्ट्रगीत के सम्मान से जोड़कर कांग्रेस पर लगातार हमला कर रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।