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वंदे मातरम् पर वारिस पठान का बयान, बोले- फांसी पर चढ़ा दें फिर भी नहीं गाएंगे!

AIMIM नेता के बयान से फिर गरमाया वंदे मातरम् विवाद

वंदे मातरम् को लेकर देश में जारी राजनीतिक बहस के बीच AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान के बयान ने विवाद को और बढ़ा दिया है। वारिस पठान ने कहा है कि वह वंदे मातरम् नहीं गाएंगे, भले ही इसके लिए उन्हें फांसी पर क्यों न चढ़ा दिया जाए। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वह वंदे मातरम् का सम्मान करते हैं, लेकिन इसे किसी पर जबरन थोपा नहीं जा सकता।

वारिस पठान के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। वंदे मातरम् को लेकर पहले से ही अलग-अलग राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी चल रही है और अब AIMIM नेता की टिप्पणी ने इस विवाद को नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है।

‘सम्मान करते हैं, लेकिन थोपा नहीं जा सकता’

वारिस पठान ने अपने बयान में वंदे मातरम् के प्रति सम्मान की बात कही, लेकिन इसके गायन को लेकर अपनी असहमति जताई। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति को जबरदस्ती वंदे मातरम् गाने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वह किसी दबाव में वंदे मातरम् नहीं गाएंगे। उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।

छात्रों के मुद्दे पर भी बोले वारिस पठान

AIMIM प्रवक्ता ने छात्रों और GenZ से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि छात्रों के आंदोलनों का समर्थन किया जाना चाहिए, लेकिन छात्रों के नाम पर राजनीति करना उचित नहीं है।

उन्होंने छात्रों के आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि आंदोलन के बाद सरकार को झुकना पड़ा। साथ ही उन्होंने छात्रों के मुद्दों को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं करने की बात कही।

मराठी भाषा को लेकर महाराष्ट्र सरकार पर निशाना

वारिस पठान ने महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर चल रही बहस पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि मराठी भाषा सीखना अच्छी बात है, लेकिन डर, धमकी या नोटिस के जरिए किसी पर भाषा थोपना उचित नहीं है।

उन्होंने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि अगर मराठी को अनिवार्य किया जा रहा है तो बॉलीवुड के बड़े सितारों और उद्योगपतियों के लिए भी समान नियम लागू किए जाने चाहिए।

ईद-ए-मिलाद पर शराबबंदी की मांग

वारिस पठान ने 26 अगस्त को ईद-ए-मिलाद के अवसर पर महाराष्ट्र में एक दिन शराब की दुकानों को बंद रखने की मांग भी की। उन्होंने तर्क दिया कि यदि अलग-अलग धार्मिक त्योहारों पर बिक्री को लेकर प्रतिबंध लगाए जाते हैं, तो ईद-ए-मिलाद के दिन भी शराब की बिक्री बंद होनी चाहिए।

उन्होंने इसे समानता और संविधान के तहत समान व्यवहार से जोड़ते हुए अपनी मांग रखी।

वंदे मातरम् पर पहले से चल रहा विवाद

वंदे मातरम् को लेकर यह विवाद पहले से ही राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है। दिए गए समाचार के अनुसार, संसद में इससे जुड़े घटनाक्रम और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इसके गायन को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी हुई है।

केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी समेत कई नेताओं ने वंदे मातरम् के विरोध को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ऐसे में वारिस पठान का नया बयान इस मुद्दे को और गरमा सकता है।

फिलहाल, वंदे मातरम् को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी जारी है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।

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