मेरठ से हापुड़ और गाजियाबाद तक पोस्टर, सपा कार्यकर्ताओं ने फाड़े
लखनऊ, 26 अगस्त 2026। उत्तर प्रदेश की सियासत में विधानसभा चुनाव से पहले पोस्टर वार ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाटलैंड कहे जाने वाले इलाकों में समाजवादी पार्टी के नेताओं के पुराने विवादित बयानों को लेकर कई होर्डिंग लगाए जाने का मामला सामने आया है। पोस्टरों में सपा प्रमुख अखिलेश यादव, शिवपाल यादव और पार्टी के अन्य नेताओं के कथित विवादित बयानों का उल्लेख किया गया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मेरठ, बागपत, हापुड़ और गाजियाबाद सहित पश्चिमी यूपी के कुछ इलाकों में पोस्टर लगाए गए। राजधानी लखनऊ में भी ऐसे पोस्टर लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। पोस्टरों में सपा नेताओं के बयानों को लेकर पार्टी पर जातिगत टिप्पणी और अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल के आरोप लगाए गए हैं।
पोस्टरों में अखिलेश यादव के बयान का जिक्र
इन होर्डिंग्स में सपा प्रमुख अखिलेश यादव से जुड़े उस कथित बयान का उल्लेख किया गया, जिसमें जयंत चौधरी को लेकर ‘चवन्नी’ शब्द का इस्तेमाल किए जाने का दावा किया गया है। जयंत चौधरी और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक संबंधों और बदलते समीकरणों को देखते हुए इस बयान को लेकर पश्चिमी यूपी की राजनीति में पहले भी चर्चा होती रही है।
पोस्टरों में सपा प्रवक्ता राजकुमार भाटी से जुड़े एक कथित विवादित बयान का भी उल्लेख किया गया है। इसके अलावा सपा नेता शिवपाल यादव से जुड़े राजभर-निषाद को लेकर कथित बयान को भी पोस्टरों में जगह दी गई।
‘सबको गाली, सबका अपमान’ का लगाया नारा
पोस्टरों पर ‘सबको गाली, सबका अपमान, समाजवादी पार्टी की यही पहचान’ जैसे नारे लिखे होने की बात सामने आई है। पोस्टर लगाने वालों ने इन बयानों को जातीय राजनीति से जोड़ते हुए सपा पर निशाना साधने की कोशिश की है।
हालांकि, इन पोस्टरों को किस संगठन या व्यक्ति की ओर से लगाया गया, इसकी आधिकारिक पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई है। ऐसे में पोस्टर वार के पीछे किसका हाथ है, इसे लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
हापुड़ में सपा कार्यकर्ताओं ने फाड़े होर्डिंग
हापुड़ में दिल्ली रोड पर होर्डिंग लगाए जाने की जानकारी मिलने के बाद समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और कथित तौर पर पोस्टरों को फाड़ दिया। रिपोर्ट के अनुसार, शहर में कई होर्डिंग लगाए गए थे, जिसके बाद स्थानीय राजनीतिक माहौल गरमा गया।
सपा कार्यकर्ताओं ने इस कार्रवाई को राजनीतिक साजिश बताते हुए विरोध जताया। एक सपा कार्यकर्ता ने आरोप लगाया कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा बौखलाई हुई है और इसी वजह से इस तरह की गतिविधियां की जा रही हैं। कार्यकर्ताओं ने मामले में मुकदमा दर्ज कराने की बात भी कही।
चुनाव से पहले बढ़ सकती है राजनीतिक बयानबाजी
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट, मुस्लिम, गुर्जर, राजभर, निषाद, ब्राह्मण और ठाकुर समेत विभिन्न सामाजिक समूहों का राजनीतिक प्रभाव माना जाता है। ऐसे में जातीय बयानों को लेकर लगाए गए पोस्टर चुनावी माहौल में राजनीतिक दलों के लिए संवेदनशील मुद्दा बन सकते हैं।
पोस्टर वार के बाद अब सपा की ओर से आगे क्या प्रतिक्रिया आती है और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है, इस पर सभी की नजरें हैं। फिलहाल पश्चिमी यूपी में लगे इन होर्डिंग्स ने राजनीतिक बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है।
Disclaimer
पोस्टरों में लिखे आरोप और बयानों का उल्लेख उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट के आधार पर किया गया है। पोस्टर किसने लगाए, इसकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। संबंधित नेताओं या राजनीतिक दलों की ओर से आगे आने वाली प्रतिक्रिया को भी इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।