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Chicken Neck Tunnel: सिलिगुड़ी कॉरिडोर में भारत क्यों बना रहा अंडरग्राउंड रेलवे टनल? जानें पूरा प्लान

Chicken Neck Tunnel: भारत देश के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाके सिलिगुड़ी कॉरिडोर में एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। सरकार यहां अंडरग्राउंड रेलवे टनल बनाने की तैयारी कर रही है। इस कॉरिडोर को आमतौर पर ‘चिकन नेक’ कहा जाता है, क्योंकि यह भारत का वह पतला हिस्सा है जो मेनलैंड इंडिया को नॉर्थ ईस्ट के आठ राज्यों से जोड़ता है।

यह जमीन का हिस्सा केवल 20 से 22 किलोमीटर चौड़ा है और यही वजह है कि इसे भारत की ज्योग्राफिकल कमजोरी भी माना जाता है। इसी कमजोरी को मजबूत करने के लिए अंडरग्राउंड रेलवे कॉरिडोर को राष्ट्रीय सुरक्षा और कनेक्टिविटी के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

चिकन नेक क्या है?

सिलिगुड़ी कॉरिडोर पश्चिम बंगाल में स्थित एक पतली पट्टी है, जिसकी सीमा नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से लगती है। यह इलाका चीन की रणनीतिक रूप से अहम चुम्बी घाटी के भी काफी करीब है। यही कारण है कि इस कॉरिडोर की सुरक्षा भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

क्यों जरूरी है अंडरग्राउंड रेलवे टनल?

इस प्रोजेक्ट के पीछे सबसे बड़ी वजह स्ट्रैटेजिक सिक्योरिटी है। अभी जो सतही रेलवे लाइनें हैं, वे खुले में रहती हैं और युद्ध या सैन्य तनाव की स्थिति में उन्हें ड्रोन, सैटेलाइट और रडार से आसानी से ट्रैक किया जा सकता है।

रेलवे ट्रैक को जमीन के नीचे ले जाकर भारत का लक्ष्य एक ऐसा ट्रांसपोर्टेशन चैनल बनाना है जिसे पहचानना और टारगेट करना बेहद मुश्किल हो। यही वजह है कि इस टनल को एक तरह का डिफेंसिव शील्ड भी माना जा रहा है।

आपदा में भी न रुकेगा नॉर्थ ईस्ट का लिंक

सिलिगुड़ी कॉरिडोर सिर्फ रणनीतिक नहीं, बल्कि बहुत ज्यादा भीड़भाड़ वाला भी है। यहां बाढ़, लैंडस्लाइड और खराब मौसम जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बना रहता है। इससे कई बार रेल सेवा बाधित हो सकती है।

अंडरग्राउंड लाइन बनने से नॉर्थ ईस्ट की कनेक्टिविटी बिना रुकावट बनी रहेगी। आपातकाल या खराब मौसम में भी खाने-पीने, फ्यूल, मेडिकल सप्लाई और जरूरी सामान की आवाजाही जारी रह सकेगी।

मिलिट्री लॉजिस्टिक्स को मिलेगा बड़ा फायदा

प्रस्तावित टनल रूट बागडोगरा एयरफोर्स स्टेशन और बेंगदुबी कैंटोनमेंट के पास से गुजरने वाला है। यह इलाका भारतीय सेना की 33 कोर के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

इस टनल से सैनिकों, भारी सैन्य उपकरण और डिफेंस सप्लाई को तेजी से, सुरक्षित तरीके से और बिना किसी बड़े खतरे के ट्रांसफर किया जा सकेगा। इससे भारत की नॉर्थ ईस्ट सीमा पर तैयारियां और मजबूत होंगी।

रेल कैपेसिटी बढ़ेगी, देरी घटेगी

फिलहाल सिलिगुड़ी कॉरिडोर में रेल ट्रैफिक सीमित है, लेकिन भीड़ ज्यादा रहती है। नए प्लान के तहत कॉरिडोर को 6 लाइन कैपेसिटी तक बढ़ाने का प्रस्ताव है—

  • 4 सतही ट्रैक
  • 2 अंडरग्राउंड ट्रैक

इससे पैसेंजर और मालगाड़ियों का अलग-अलग मैनेजमेंट हो सकेगा, जिससे एफिशिएंसी बढ़ेगी और देरी कम होगी। इसके साथ ही नॉर्थ ईस्ट में आर्थिक विकास को भी बड़ा सपोर्ट मिलेगा।

टनल प्रोजेक्ट की खास बातें

प्रस्तावित अंडरग्राउंड रेलवे लाइन करीब 35.76 किलोमीटर लंबी होगी। यह पश्चिम बंगाल के तिनमिलहाट, रंगापानी और बागडोगरा को जोड़ेगी।

टनल को जमीन से करीब 20 से 24 मीटर नीचे बनाने की योजना है। निर्माण में Tunnel Boring Machine (TBM) और New Austrian Tunneling Method (NATM) जैसी एडवांस तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि सुरक्षा और टिकाऊपन सुनिश्चित किया जा सके।

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