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राघव चड्ढा ने संसद में उठाया मोबाइल रिचार्ज का मुद्दा, 12 महीने में 13 बार रिचार्ज क्यों?

नई दिल्ली:
राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद Raghav Chadha ने देश के करोड़ों मोबाइल यूजर्स से जुड़ा बड़ा मुद्दा उठाया। उन्होंने प्रीपेड मोबाइल रिचार्ज प्लान और टेलीकॉम कंपनियों की नीतियों पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि ग्राहकों को साल में 12 की जगह 13 बार रिचार्ज करना पड़ता है।

सांसद ने कहा कि मोबाइल रिचार्ज की वैलिडिटी खत्म होने के बाद टेलीकॉम कंपनियां इनकमिंग कॉल और मैसेज तक बंद कर देती हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

रिचार्ज खत्म होते ही क्यों बंद हो जाती हैं इनकमिंग कॉल?

राज्यसभा में बोलते हुए Raghav Chadha ने कहा कि अगर किसी यूजर का रिचार्ज खत्म हो जाता है तो आउटगोइंग कॉल बंद होना समझ में आता है।

लेकिन इनकमिंग कॉल और मैसेज भी बंद कर देना सही नहीं है। इससे लोगों को बैंक OTP, जरूरी मैसेज और इमरजेंसी कॉल्स तक नहीं मिल पाते।

उन्होंने कहा कि कई बार लोग अचानक पूरी तरह से संपर्क से बाहर हो जाते हैं, जो सुरक्षा और संचार दोनों के लिहाज से चिंता का विषय है।

सरकार से की ये मांग

सांसद ने सरकार से मांग की कि आखिरी रिचार्ज के बाद कम से कम एक साल तक इनकमिंग कॉल और SMS चालू रहने चाहिए ताकि जरूरी संचार बाधित न हो।

इसके अलावा उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि मोबाइल नंबर को कम से कम तीन साल तक डिएक्टिवेट नहीं किया जाना चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं को बार-बार नंबर बदलने की परेशानी न हो।

‘सिर्फ इनकमिंग’ वाला सस्ता प्लान लाने की मांग

राघव चड्ढा ने कहा कि टेलीकॉम कंपनियों को ऐसे यूजर्स के लिए कम कीमत वाला “सिर्फ इनकमिंग” प्लान लाना चाहिए, जिन्हें सिर्फ कॉल रिसीव करने, OTP या सरकारी सेवाओं के लिए मोबाइल नंबर एक्टिव रखना होता है।

28 दिन के प्लान पर भी उठाए सवाल

उन्होंने 28 दिन वाले मोबाइल रिचार्ज प्लान पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर किसी प्लान को “मंथली” कहा जाता है तो उसकी वैलिडिटी 30 या 31 दिन होनी चाहिए।

28 दिन के प्लान की वजह से यूजर्स को एक साल में 13 बार रिचार्ज करना पड़ता है क्योंकि 28 दिन × 13 रिचार्ज = 364 दिन हो जाते हैं।

90% मोबाइल यूजर्स पर असर

सांसद ने कहा कि भारत में लगभग 125 करोड़ मोबाइल यूजर्स हैं, जिनमें से करीब 90 प्रतिशत लोग प्रीपेड सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए यह मुद्दा करोड़ों उपभोक्ताओं से जुड़ा हुआ है और इसमें पारदर्शिता और उपभोक्ता हितों का ध्यान रखना जरूरी है।

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