अयोध्या महायज्ञ में लगी भीषण आग, बड़ा हादसा टला
रामनगरी अयोध्या में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब सरयू तट पर चल रहे 51 कुंडीय लक्ष्मी नारायण महायज्ञ में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और पूरा यज्ञ परिसर इसकी चपेट में आ गया।
घटना श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से महज 800 मीटर की दूरी पर हुई, जिससे आसपास के इलाके में भी हड़कंप मच गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।
नारियल फटने से लगी आग की आशंका
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, यज्ञ के समापन के बाद महाआहुति के दौरान चढ़ाए गए नारियल के फटने से चिंगारी निकली, जिसने कपड़े से बने पंडाल में आग लगा दी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में पूरा पंडाल धूं-धूंकर जलने लगा। यज्ञशाला में बड़ी संख्या में बनाए गए हवन कुंड और सजावट की सामग्री आग का ईंधन बन गई।
हजारों श्रद्धालु थे मौजूद
इस महायज्ञ में करीब 5 हजार से अधिक श्रद्धालु शामिल हुए थे। आयोजन में कुल 1,251 हवन कुंड बनाए गए थे, जहां नौ दिनों तक धार्मिक अनुष्ठान चला।
यह आयोजन दयाशंकर सिंह द्वारा करवाया गया था। कार्यक्रम के अंतिम दिन अभय सिंह भी मौजूद रहे।
गनीमत रही कि यज्ञ समाप्त होने के बाद अधिकांश श्रद्धालु वहां से जा चुके थे, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
दमकल ने संभाला मोर्चा
घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का प्रयास शुरू किया।
डॉ. गौरव ग्रोवर ने बताया कि अतिरिक्त फायर ब्रिगेड और पुलिस बल तैनात किया गया है। आग पर काबू पाने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया गया।
बताया जा रहा है कि आग यज्ञशाला से पास की गौशाला तक भी फैल गई थी, जिसे समय रहते नियंत्रित कर लिया गया।
जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई
हालांकि अभी तक आग लगने के कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन नारियल फटने की वजह से चिंगारी निकलने की आशंका जताई जा रही है।
प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बड़े धार्मिक आयोजनों में अग्नि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों से बचा जा सके।