वेस्ट एशिया में जारी तनाव के बीच इजराइल और लेबनान के बीच 10 दिन के युद्धविराम पर सहमति बनी है। इसे क्षेत्र में शांति की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा कि यह फैसला लेबनान के साथ शांति प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए लिया गया है।
नेतन्याहू का बयान: ‘ऐतिहासिक मौका’
नेतन्याहू ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि यह समझौता एक “ऐतिहासिक अवसर” है, जिससे दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम किया जा सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में स्थायी शांति समझौते की दिशा में भी बातचीत हो सकती है।
हिजबुल्ला ने रखी शर्तें
इजराइल के खिलाफ लड़ रहे संगठन Hezbollah ने इस युद्धविराम पर सावधानी भरा रुख अपनाया है। संगठन ने स्पष्ट कहा है कि युद्धविराम केवल सीमित क्षेत्रों में नहीं, बल्कि पूरे लेबनान में लागू होना चाहिए। हिजबुल्ला का कहना है कि इजराइल को किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि की छूट नहीं दी जानी चाहिए। उनका यह बयान इस समझौते को जटिल बना सकता है।
अमेरिका की मध्यस्थता और ट्रंप की भूमिका
इस पूरे समझौते में अमेरिका की अहम भूमिका रही है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इसे “उत्साहजनक अवसर” बताते हुए कहा कि यह शांति की दिशा में एक मजबूत शुरुआत है। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि इजराइल और लेबनान के नेताओं के बीच जल्द ही आमने-सामने बैठक हो सकती है, जो 34 साल बाद एक बड़ा कूटनीतिक कदम होगा।
जमीनी स्थिति अभी भी तनावपूर्ण
हालांकि युद्धविराम की घोषणा हो चुकी है, लेकिन जमीनी हालात अब भी तनावपूर्ण हैं। इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में सैन्य अभियान चलाया है, जहां उसकी सेना और हिजबुल्ला के बीच लगातार संघर्ष जारी है। यह अभी स्पष्ट नहीं है कि युद्धविराम के तहत इजराइल अपनी सेना को पूरी तरह वापस बुलाएगा या नहीं।
क्या स्थायी शांति संभव?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह युद्धविराम एक सकारात्मक संकेत जरूर है, लेकिन स्थायी शांति के लिए दोनों पक्षों को कई कठिन मुद्दों पर सहमति बनानी होगी। अगर यह वार्ता सफल रहती है, तो वेस्ट एशिया में लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष में कमी आ सकती है और क्षेत्र में स्थिरता लौट सकती है।