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रूस से तेल खरीदने पर भारत को बड़ी राहत, ट्रंप ने 100% टैरिफ का खतरा फिलहाल टाला

अमेरिका के राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय हित का हवाला देकर प्रतिबंधों और शुल्कों से दी छूट, भारतीय निर्यातकों को मिल सकती है राहत; आगे की नीति पर बनी रहेगी नजर

वॉशिंगटन/नई दिल्ली। रूस से कच्चा तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत को अमेरिका की ओर से फिलहाल बड़ी राहत मिली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर प्रतिबंधों से जुड़े नए कानून के कई प्रावधानों को लागू करने से छूट देने का आदेश जारी किया है। इस कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान था। भारत भी उन देशों में शामिल है, जिन पर इस कदम का असर पड़ सकता था।

राष्ट्रीय हित का हवाला देकर जारी किया आदेश

व्हाइट हाउस के अनुसार, ट्रंप ने 16 अक्टूबर को कार्यकारी आदेश जारी कर ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट, 2026’ के तहत निर्धारित कुछ प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों से छूट दी। राष्ट्रपति ने अमेरिकी कांग्रेस को प्रमाणित किया कि मौजूदा समय में यह छूट देना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। यह फैसला कानून में राष्ट्रपति को दिए गए अधिकारों के इस्तेमाल के तहत लिया गया है।

भारत पर टैरिफ का खतरा क्यों था?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। रूस भी भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। ऐसे में रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त अमेरिकी टैरिफ लगाया जाता, तो भारतीय उत्पादों को अमेरिका के बाजार में बेचने की लागत बढ़ सकती थी। इससे निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा प्रभावित होने और कारोबार पर दबाव पड़ने की आशंका थी।

भारतीय निर्यातकों को कैसे मिल सकती है राहत?

फिलहाल मिली छूट से रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर इस कानून के तहत अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने का तत्काल खतरा कम हुआ है। इससे उन भारतीय कंपनियों को राहत मिल सकती है, जिनका कारोबार अमेरिकी बाजार पर निर्भर है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत से अमेरिका जाने वाले सभी सामान पर पहले से लागू हर शुल्क खत्म कर दिया गया है। अन्य व्यापारिक नियमों और टैरिफ का असर अलग-अलग बना रह सकता है।

रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़ा है पूरा मामला

अमेरिका ने रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से यह कानून बनाया था। इसका मकसद रूस की ऊर्जा से होने वाली कमाई और यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध से जुड़े आर्थिक संसाधनों पर दबाव डालना था। कानून में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का अधिकार राष्ट्रपति को दिया गया। इस व्यवस्था के तहत 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की संभावना ने भारत और चीन जैसे देशों की चिंताएं बढ़ा दी थीं।

राहत मिली, लेकिन आगे भी बनी रहेगी अनिश्चितता

ट्रंप के ताजा आदेश से भारत को फिलहाल राहत जरूर मिली है, लेकिन इसे स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता। आदेश के मुताबिक, छूट को भविष्य में राष्ट्रपति या संबंधित वरिष्ठ अधिकारी उचित समझे जाने पर बदल सकते हैं। इसलिए भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा, कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण रहेगा।

कुल मिलाकर, अमेरिका के इस फैसले से भारत पर रूस से तेल खरीदने के कारण अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने का तत्काल खतरा टला है। हालांकि, भारतीय कारोबार और निर्यात पर अंतिम असर अमेरिका की आगे की व्यापार नीति तथा अन्य लागू शुल्कों पर निर्भर करेगा।

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